राष्ट्रीय दिव्यांग दिवस पर आयोजित कार्यक्रम में शामिल हुये कलेक्टर श्री कोचर




दमोह : यह बहुत ही भाव भीना और मन को भाव विभोर करने वाला दृश्य है, कि हमारे बीच में यह बच्चे जो कि दिव्यांग है, इन्होंने अपनी क्षमताओं का सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन करते हुए यह साबित किया है कि वे किसी मायने में किसी से भी कम नहीं है और उन्हें कम आंकने की भूल कतई नहीं की जानी चाहिए। आज जो प्रदर्शन हमें दिखा है उससे यह साबित होता है कि उन्हें हमारी सहानुभूति की जरूरत नहीं है, हमारी समानुभूति की जरूरत है, लेकिन जब हम समानुभूति व्यक्त करते हैं तब हम उन्हें अपने समान मानते हैं, अपने समान दर्जा देकर अपने साथ लेकर के चलते हैं, यही समरसता और सद्भाव का संदेश इन बच्चों ने अपनी क्षमता के साथ दिया है। इस आशय की बात कलेक्टर सुधीर कुमार कोचर ने कहा कलेक्ट्रेट परिसर में विश्व दिव्यांग दिवस आयोजित कार्यक्रम में कही।
कलेक्टर श्री कोचर ने कहा इस कार्यक्रम को देखकर मन बहुत ही भाव विभोर है, स्वच्छता का संदेश बड़े-बड़े नहीं दे पाते हैं, जब भी मैं बच्चों के साथ रहता हूं तो बहुत खुशी होती है, हम अपने बचपन को याद करते हैं, साथ में ऐसा लगा कि ईश्वर ने जो हमें दिया है, हम उसके प्रति कभी कृतज्ञता व्यक्त नहीं करते हैं कि हमें सब कुछ मिला है, ना तो हम कृतज्ञता करते हैं, बल्कि उसकी कई बार दुरुपयोग भी करते हैं । उन्होंने कहा ईश्वर के सामने नजरें झुकी हुई थी, क्योंकि बच्चों में क्षमता न होने के बावजूद भी दिव्यांग्यता होने के बावजूद वह इतना अच्छा कर रहे हैं और हम सभी तरह से सक्षम होने के बावजूद भी अपना हंड्रेड प्रतिशत नहीं दे पाते हैं और हम ना ईश्वर के प्रति वैसा कृतज्ञता का भाव रख पाते हैं। आज इन बच्चों को देखकर मेरे मन में ईश्वर के प्रति असीम प्रेम है, हम इसका बेहतर से बेहतर उपयोग कर पाए यही संदेश इन बच्चों ने शायद आज हमें दिया है, वह 1 मिनट में मूक बधिर बच्चियों ने स्वच्छता का संदेश दिया है, बहुत सुंदर डांस यहां पर प्रस्तुत किया है। इन बच्चों को हमारे साथ कि हमारे सहयोग की, हमारी संगति की आवश्यकता है। इनके साथ जितना अधिक सिंपैथी के साथ काम करेंगे उतनी जल्दी यह बहुत आगे बढ़ेंगे, इनका सिक्सथ सेंस बहुत पावरफुल होता है, चीजों को बहुत जल्दी सीखते हैं, इसलिए तय किया था कि जो दिव्यांगो के लिए डीडीआरसी बना हुआ है, दिव्यांग पुनर्वास केंद्र जो की तत्कालीन कलेक्टर स्वतंत्र कुमार सिंह सर जब यहां पर थे, तब उन्होंने इसको रिनोवेट कराया था पिछले 10-11 साल पहले, अब एक बार फिर हम इसको नए स्वरूप में डेवलपमेंट करने जा रहे हैं, रेड क्रॉस की तरफ से इसके लिए पैसा दिया है। आगामी 6 या 7 तारीख को जब विधायक जी समय देंगे इसके रिनोवेशन कार्यक्रम का शुभारंभ भी होगा, यह अंदर से बहुत व्यवस्थित हो जाएगा और यहां पर एक दिव्यांग पार्क भी बनवा रहे हैं, ताकि दिव्यांग बच्चों के लिए खेलने की बहुत अच्छी जगह यहां पर हो जाए। जो उपकरण है उन्हें भी बदलने का काम किया जाएगा, लगभग 18 लाख रुपए की लागत से सारे काम यहां पर करने की प्लानिंग है, जिसका शुभारंभ कुछ दिनों में होगा।
मुख्य कार्यपालन अधिकारी जिला पंचायत दमोह अर्पित वर्मा ने कहा आज के समय में कितना बदलाव आ गया है, लोग कितना जागरूक हो गए हैं, अब उस तरह की उपेक्षाएं नही होती है जो पहले हुआ करती थी। अब सरकार जो प्रयास कर रही है, वे बहुत ही गंभीर प्रयास होते हैं, जैसे हम लोगों ने भी प्रयास करके डी.डी.आर.सी. चालू करवाया था, जब से स्टाफ आया है तब से कुछ-कुछ चीज इंप्रूव हुई है।
उन्होंने कहा इन सभी बच्चों को पहले से जानता हूं, इनकी प्रस्तुतियों अच्छी हैं, इनका उत्साह देखकर बड़ा अच्छा लगता है और मन करता है कि हम लोग इन्हें मेनस्ट्रीम में लाने के लिए जितने भी एफर्ट्स हो सकते हैं हम करें। आप सभी टीचर्स को धन्यवाद देता हूं, आपको शुरू से देखा है बच्चों के साथ कितना जुड़वा कर लेते हैं, आप लोग बहुत मेहनत करते हैं, ऐसे ही करते रहिए हम जितना आपकी मदद कर सकते हैं करेंगे, आप हमें बताएंगे तो जो भी शासन से या अलग से जो भी सुविधा मुहैया करा सकते हैं, जरूर करेंगे। इन बच्चों का आप जितना ध्यान रखते हैं उतना ही ध्यान रखें, उनकी केयर में कभी भी कमी ना आए। उन्होंने कहा केंद्रीय मंत्री टीकमगढ़ जिले के हैं, वे सामाजिक न्याय विभाग को देख रहे हैं कई बार दमोह आ चुके हैं यदि आपको ऐसी कोई आवश्यकता है तो जरूर हमें लिख कर दीजिए, सांसद जी के माध्यम से प्रयास करेंगे कि दमोह में दिव्यांगों के लिये कुछ कर सकते हैं या कोई प्रोजेक्ट हो तो उस पर चर्चा कर सकते हैं। उन्होंने कहा मध्य प्रदेश सरकार के साथ-साथ केंद्र सरकार की भी उसमें मदद ली जायेगी और एक अच्छा स्कूल इन्हें यहां पर दे पाए, ताकि वह अपने जीवन में परेशानियां, कठिनाई को दूर करते हुए अपने जीवन को सक्षम बना सके। दिव्यांगजनों को दया के भाव में न देखकर सहयोग के भाव से देखें और उनका सहयोग करें ताकि वह अपनी आत्म शक्ति को जगा सके और अपने जीवन को बेहतर बना सके।
प्रतीक्षा सिंघई ने कहा 3 दिसम्बर को पूरे विश्व में विश्व दिव्यांग दिवस मनाया जाता है, यह डब्ल्यू.एच.ओ. और संयुक्त राष्ट्र की तरफ से मनाया जाता है। हम दिव्यांगों को डिसेबल्ड ना बोलकर हम उन्हें डिफरेंटली एबल्ड बोले, जिसका मतलब कुछ विशेष क्षमता रखने वाले लोग हैं, डिसेबल्ड इधर कोई नहीं है, उनके प्रोत्साहन के लिए उनको समानता का अवसर दिलाने के लिए यह प्रोग्राम आयोजित कर रहे हैं। उन्होंने कहा केंद्र सरकार, राज्य सरकार, शासन प्रशासन सभी दिव्यांगों के उत्थान, प्रोत्साहन और उन्हें सम्मान दिलाने के लिए प्रतिबद्ध है। केंद्र और राज्य सरकार की कई सारी योजनाएं संचालित हो रही हैं, जिसमें सामाजिक न्याय विभाग की योजना के अंतर्गत नि:शक्त विवाह प्रोत्साहन योजना, दिव्यांग पेंशन योजना, विशेष उपकरण प्रदाय योजना ऐसी कई योजना दिव्यांगों के लिए चलाई जा रही है। केंद्र सरकार सुगम्य भारत नाम से एक विश्व व्यापी पहल चल रही है, जो भी सरकारी बिल्डिंग बनती है वे दिव्यांगों के लिए सुगम बने और यातायात दिव्यांगों को सक्षम बने, मोबाइल एप, वेब पोर्टल इत्यादि सभी को दिव्यांग सुलभ बनाने में शासन प्रयासरत है।
उन्होंने कहा जिले में लगभग 16 हजार दिव्यांग है, जिनमें से लगभग 15 हजार 170 आर्थिक रूप से कमजोर दिव्यांग है, उनके लिए पेंशन स्कीम चल रही है जिसमें 600 मासिक पेंशन शासन देती है, इसके अलावा इस वर्ष 21 दिव्यांग दंपतियों को निशक्त विवाह प्रोत्साहन योजना के तहत लाभ दिलाया गया है, इस वर्ष 146 दिव्यांगों को विभिन्न शिविर के माध्यम से विशेष उपकरण जिसमें कान की मशीन, बैसाखी, मोटराइज्ड ट्राईसाईकिल इत्यादि वितरित किए हैं।
उन्होंने कहा यह दिव्यांग पुनर्वास केंद्र है जिसमें विभिन्न प्रकार की दिव्यांगो के विषय विशेषज्ञ है, जो दिव्यांगों की काउंसलिंग सकते हैं, जो दिव्यांगजन हाथ या पैस से नि:शक्त है उनकी फिजियोथैरेपी, कृत्रिम अंग निर्माण इत्यादि का काम यहां पर होता है, यहां पर दिव्यांगों के अभिभावकों की भी काउंसलिंग की जाती है, कि उन्हें बच्चों की देखभाल कैसे करनी है, सब बताया जाता है। इसी प्रकार दिव्यांग विद्यार्थियों के लिए कक्षा 1 से 8 तक सामाजिक न्याय विभाग का विशेष विद्यालय अंधमूंक विदर्भ विद्यालय संचालित है जो तहसील मैदान में चल रहा है।
