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एक करोड़ 48 लाख रुपए की लागत से बनाया गया था गौरव पथ
राहगीरों को आवागमन में हो रही है परेशानी

बालाघाट। सीमेंट कांक्रीट सडक़ से सीमेंट गायब हो गई है। सडक़ से नुकीले पत्थर निकलने लगे हैं। राहगीरों को आवागमन में परेशानी हो रही है। एक वर्ष में ही भ्रष्टाचार की सडक़ उखड़ गई। निम्न गुणवत्ता की इस सडक़ की जांच करने के लिए बुधवार को प्रशासनिक अधिकारियों की टीम मौके पर पहुंची। अधिकारियों ने सडक़ का जायजा लिया। गुरुवार को इस सडक़ का सेंपल जांच के लिए एकत्र किया जाएगा। मामला नगर के आंबेडकर चौक से मोतीनगर के बीच उद्यान व कोतवाली के सामने बनने वाली गौरव पथ का है। बुधवार को तीन विभागों के प्रमुखों का दल निरीक्षण करने पहुंचा था।
जानकारी के अनुसार शहर में राहगीरों को सुगम आवागमन के लिए गौरव पथ का निर्माण कराया गया है। लेकिन यह गौरव पथ अब अपने भ्रष्टाचार की गाथा गा रहा है। खासतौर पर आंबेडकर चौक से लेकर मोतीनगर चौक तक बनी सडक़ इसका उदाहरण है। यह सडक़ एक वर्ष पूर्व ही 1 करोड़ 48 लाख रुपए की लागत से बनकर तैयार हुई है। लेकिन सडक़ निर्माण के दौरान गुणवत्ता का ध्यान नहीं रखा गया। जिसके चलते यह सडक़ एक वर्ष में ही उखड़ गई। यह सडक़ अब राहगीरों के लिए परेशानी का सबब बन गई है।
तीन विभागों के प्रमुखों ने देखी सडक़
कलेक्टर के निर्देश पर बुधवार को सुबह 9 बजे एसडीएम गोपाल सोनी ने पीएचई के कार्यपालन यंत्री, हाउसिंग बोर्ड के कार्यपालन यंत्री की टीम और निर्माण एजेंसी पीडब्ल्यूडी व ठेकेदार के साथ सडक़ का निरीक्षण किया। इस दौरान अधिकारियों ने कृषि विभाग के सामने से हार्टिकल्चर विभाग और कोतवाली थाना से मोती गार्डन के गेट तक बनी सीसी सडक़ का निरीक्षण किया। यहां जांच करने पहुंचे अधिकारियों ने भी सडक़ को देखने के बाद माना कि गुणवत्ता सही नहीं है।
अधिकारियों ने भी पाई खामियां
निरीक्षण करने के लिए पहुंचे अधिकारियों ने भी सडक़ निर्माण कार्य में खामियां पाई है। अधिकारियों ने भी माना है कि सडक़ का निर्माण कार्य निम्न गुणवत्ता का हुआ है। यहां विडंबना यह है कि जब सडक़ का निर्माण कार्य किया जा रहा था, तब गुणवत्ता को लेकर प्रशासन के संज्ञान में मामला लाया गया था। लेकिन राजनीतिक संरक्षण के चलते न तो गुणवत्ता को सुधारा गया और न ही ठेकेदार पर कोई कार्रवाई की गई। जिसके चलते ठेकेदार ने मनमर्जी से सडक़ का निर्माण कार्य पूरा किया है। जिसका खामियाजा अब राहगीरों को भुगतना पड़ रहा है।
ठेकेदार को है राजनीतिक संरक्षण
सडक़ निर्माण कार्य करवाने वाले ठेकेदार को राजनीतिक संरक्षण प्राप्त था। जिसके चलते निर्माण कार्य के दौरान किसी भी अधिकारी ने निरीक्षण नहीं किया। यदि अधिकारियों ने निरीक्षण किया होगा तो उसमें औपचारिकता निभा दी। जिसके चलते सीमेंट कांक्रीट सडक़ भ्रष्टाचार की भेंट चढ़ गई। अब प्रशासनिक अधिकारी जांच में गुणवत्ता पर सवाल उठा रहे हैं।
इनका कहना है
कलेक्टर के निर्देश पर बुधवार को सडक़ की जांच की गई। सडक़ में पेंच खराब हो गए है। गुणवत्ता में भी कमी दिखाई दे रही है। कोर कटर से 19 दिसंबर को सडक़ का सैंपल लिया जाएगा। जिसके बाद सडक़ को लेकर एक विस्तृत रिपोर्ट कलेक्टर को सौंपी जाएगी।
-गोपाल सोनी, एसडीएम

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