
महिला वकील ने किया मना, सुनवाई टली
नई दिल्ली। जम्मू-कश्मीर और लद्दाख हाईकोर्ट ने पिछले दिनों ऐसी मुस्लिम महिला वकील की बात सुनने से इंकार किया, जिसने सुनवाई के दौरान अपना चेहरा ढका हुआ था। सुनवाई के दौरान जज ने महिला से नकाब हटाकर चेहरा दिखाने को कहा था, कथित वकील ने चेहरा दिखाने से मना कर दिया। इसके बाद जज ने मामले की सुनवाई करने से इंकार किया और हाई कोर्ट के रजिस्ट्रार जनरल से रिपोर्ट मांगी कि क्या किसी महिला वकील को चेहरा ढककर किसी मामले की पैरवी करने की अनुमति है।
रिपोर्ट के मुताबिक, हाई कोर्ट की जस्टिस मोक्ष खजूरिया काजमी ने अपने आदेश में कहा कि बार काउंसिल ऑफ इंडिया (बीसीआई) द्वारा निर्धारित नियमों में से किहीं उल्लेख नहीं है, जिसके तहत कोई भी महिला चेहरे पर नकाब लगाकर या बुर्का पहनकर अदालत में मामले की पैरवी कर सकें। कोर्ट ने कहा कि बीसीआई की नियमावली के अध्याय में महिला अधिवक्ताओं के लिए अनुमत ड्रेस कोड का विवरण है। कोर्ट ने कहा, इन नियमों में कहीं भी यह नहीं कहा गया है कि इस न्यायालय के समक्ष उपस्थित होने के लिए इस तरह की कोई पोशाक स्वीकार्य है।
दरअसल, 27 नवंबर को हाई कोर्ट में कथित तौर पर एक महिला वकील पेश हुई थीं, महिला वकील ने अपना नाम सैयद एनैन कादरी बताया था और घरेलू हिंसा से जुड़े मामले में याचिकाकर्ता की तरफ से पेश होकर मामले को रद्द करने की मांग की। इस दौरान वह कोर्ट रूम में वकील की ड्रेस में थीं लेकिन अपने चेहरे को ढक रखा था। तब जस्टिस राहुल भारती मामले की सुनवाई कर रहे थे। जस्टिस भारती ने तब उस महिला वकील से चेहरे पर से नकाब हटाने को कहा लेकिन कादरी ने मना कर दिया। महिला वकील ने जोर देकर कहा कि चेहरा ढकना उसका मौलिक अधिकार है और कोर्ट उससे जबरन ऐसा करने को नहीं कह सकता।
इसके बाद जस्टिस भारती ने अर्जी पर सुनवाई करने से इंकार कर कहा कि मामले में पैरवी के लिए पेश हुई महिला को वकील के तौर पर ना विचार कर सकते हैं और न ही नियमों के मुताबिक स्वीकार्य कर सकते हैं क्योंकि चेहरा ढके होने की स्थिति में यह तय नहीं हो सका कि वह महिला कौन है या उसकी पहचान क्या है। कोर्ट ने मामले सुनवाई स्थगित करते हुए आगे की तारीख दे दी और रजिस्ट्रार जनरल से बीसीआई के नियमों के तहत यह पुष्टि करने को कहा कि क्या ऐसा कोई नियम है, जिसके तहत महिला वकील चेहरा ढक कर पेश हो सकें और मामले की पैरवी कर सकें।
