
आप कानून व्यवस्था को लेकर केंद्र सरकार पर लगाती है आरोप
नई दिल्ली। दिल्ली की कानून व्यवस्था को लेकर सियासी गरमा गई है। दिल्ली में बढ़ते अपराध राजनीतिक मुद्दा बन गए हैं। बीजेपी के नेतृत्व वाली केंद्र सरकार पर आम आदमी पार्टी हमलावर है। आप हमेशा हत्याओं, गैंगवार, रंगदारी, लूटपाट समेत अन्य आपराधिक वारदातों का हवाला देकर लचर कानून व्यवस्था का आरोप लगाती रही है। क्योंकि दिल्ली की कानून व्यवस्था केंद्र सरकार के अधीन है। पिछले कई महीनों में दिल्ली के रेस्टोरेंट और इलाकों में गोलीबारी की घटनाएं सामने आई हैं।
दिल्ली में बढ़ रहीं आपराधिक वारदातों को लेकर कुछ समय पहले गृह मंत्री अमित शाह ने दिल्ली पुलिस के अधिकारियों को सख्त दिशा-निर्देश भी दिए थे। ऐसे में आगामी विधानसभा चुनाव में राजनीतिक स्तर पर दिल्ली की कानून व्यवस्था अहम मुद्दा बन रही है। दिल्ली की कानून व्यवस्था में खामियों पर सवाल उठने लगे हैं।
ऐसा नहीं है कि दिल्ली बीते सालों में कानून व्यवस्था को बेहतर बनाने के प्रयास नहीं किए गए, लेकिन ये पर्याप्त नहीं है। दिल्ली के लोग चाहते हैं शहर अपराध मुक्त हो, जहां लोग बेखौफ होकर रह सकें। उद्यमी निवेश कर सकें, अभिभावक अपने बच्चों को बेहिचक बाहर भेज सकें, महिलाएं बिना डर के कहीं भी आ और जा सकें और शिकायत पर त्वरित कार्रवाई हो।
स्मार्ट पुलिसिंग के लिए नई तकनीक, साफ्टवेयर, डाटा एनालिसिस, इंटरसेप्ट सिस्टम, ड्रोन और आधुनिक वाहन उपलब्ध कराए जाने की जरुरत है। पुलिसिंग में राजनीतिक हस्तक्षेप सबसे बड़ी समस्या है। इसके चलते ही एक से दो साल में राज्यों और जिलों के मुखिया बदल दिए जाते हैं। लोग चाहते हैं केंद्र सरकार ऐसा कानून बनाए जिसमें किसी भी राज्य या जिले के मुखिया को दो साल से पहले बदला न जा सके, ताकि अफसर कानून-व्यवस्था को लेकर शहर या राज्य के लिए योजना बनाकर और उसे लागू कर सके।
दिल्ली से सटे राज्यों की पुलिस के साथ समन्वय बनाकर इन पर कार्रवाई हो, जिससे दिल्ली में सुरक्षित माहौल बने। इसके साथ ही विदेश में बैठे अपराधी दिल्ली में अपने गुर्गों के जरिये वारदात कराते है, इनकी धरपकड़ के लिए विशेष प्रयास करने की जरूरत है। महिलाओं के खिलाफ अपराध पर त्वरित कार्रवाई करना दिल्ली पुलिस की प्राथमिकताओं में शामिल है, लेकिन हाल यह है कि महिला पीड़ितों की दिल्ली के थानों में कोई सुनने वाला नहीं होता है। पिछले 25 सालों में गृह मंत्रालय, दिल्ली पुलिस को पब्लिक फ्रेंडली बनाने की दिशा में प्रयास कर रहा है। कई मौकों पर केंद्रीय गृह मंत्री दिल्ली पुलिस को पब्लिक फ्रेंडली बनाने की नसीहत दे चुके हैं, लेकिन अभी भी महिलाएं शिकायत दर्ज कराने के लिए थाने तक नहीं पहुंच पाती हैं।
साइबर अपराधों का अंदाजा इससे लगाया जा सकता है कि हर दिन गृह मंत्रालय के साइबर क्राइम पोर्टल पर करीब सात से आठ हजार शिकायतें आती हैं। जागरूकता के अभाव में पीड़ित पहले हेल्पलाइन नंबर 1930 पर काल करने के बजाय साइबर थाने में शिकायत करने चले जाते हैं। तब तक साइबर अपराधी उनके पैसे डकार जाते हैं। इनकी धरपकड़ के साथ ही लोगों को जागरूक करने की भी जरुरत है। दिल्ली में जितनी तेजी से जनसंख्या बढ़ रही है उस हिसाब से दिल्ली पुलिस की संख्या दो लाख से ज्यादा होनी चाहिए लेकिन उनकी संख्या 90 हजार से भी कम हैं। इनमें भी अधिकतर वीवीआइपी की सुरक्षा में लगे होते हैं। पुलिसकर्मियों की संख्या कम होने के कारण सड़कों पर उनकी मुस्तैदी न के बराबर होती है।
