

छिन्दवाड़ा ! 29 दिसंबर को “सांझी पहल संस्था” द्वारा से जुड़े पहल केन्द्र, देवार्धा गाव, जिला छिंदवाडा के विद्यार्थियों का श्री बादल भोई आदिवासी संग्रहालय में एक्सपोज़र विजिट करवाया गया. बादल भोई आदिवासी संग्रहालय, छिंदवाड़ा, मध्य प्रदेश राज्य में स्थित एक संग्रहालय है जो आदिवासी संस्कृति और इतिहास को प्रदर्शित करता है। यह संग्रहालय आदिवासी समुदाय के जीवन, उनकी परंपराओं, कला, और उनके विकास को प्रदर्शित करता है।
यह संग्रहालय मध्यप्रदेश और छत्तीसगढ़ की विभिन्न जनजातियों की जीवनशैली, सांस्कृतिक धरोहर, प्रतीक चिन्हों और कला-शिल्पों को प्रदर्शित करता है। संग्रहालय में जनजातीय समुदायों के दैनिक जीवन में उपयोग होने वाली वस्तुएं, कपड़े, हथियार, शिकार और खेती के औजार भी रखे गए हैं। इसके अलावा, बैगा जनजाति के पारंपरिक घर और गोंड जनजाति के विकास को भी दर्शाया गया है।
इस संग्रहालय में आदिवासी संस्कृति से जुड़ी विभिन्न वस्तुओं और कलाकृतियों का संग्रह है, जो आदिवासी समुदाय के जीवन और संस्कृति को दर्शाती हैं। यह संग्रहालय उन लोगों के लिए विशेष रूप से महत्वपूर्ण है जो आदिवासी संस्कृति को समझना चाहते हैं और उनकी विरासत को संरक्षित करने में रुचि रखते हैं।
संग्रहालय में 17 कक्ष और 6 गैलरी हैं, जहां प्रत्येक जनजाति की कला और सांस्कृतिक धरोहर को मॉडल, फोटो, चार्ट और नक्शों के माध्यम से शोकेस किया गया है। विद्यार्थियों ने इन अनोखी और ऐतिहासिक वस्तुओं को करीब से देखा और बहुत कुछ सीखा।
बादल भोई आदिवासी संग्रहालय एक महत्वपूर्ण सांस्कृतिक केंद्र है जो आदिवासी संस्कृति को प्रदर्शित करने और संरक्षित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।
इस विजिट में सांझी पहल के 20 विद्यार्थी शामिल हुए। इस अवसर पर सांझी पहल की सामाजिक कार्यकर्ता नेहा इंदौरकर और सोनम इंदौरकर ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।
इस विजिट ने बच्चों और उनके पालकों को जनजातीय जीवनशैली की गहरी समझ प्रदान की। सांझी पहल की यह यात्रा एक शिक्षाप्रद और प्रेरणादायक अनुभव साबित हुई।
