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प्रयागराज। महाकुंभ के मौनी अमावस्या स्नान के दौरान मची भगदड़ में 50 से 60 लोग दब गए और कई घायल हो गए हैं। इस घटना में कई श्रद्धालु लापता बताए जा रहे हैं और उनके परिजन उन्हें ढूंढने इधर-उधर भटक रहे हैं। लोगों ने बताया कि अचानक भीड़ बढ़ी तो लोगों को संभालना मुश्किल हो गया, जिससे भगदड़ मच गई।
कोलकाता से महाकुंभ में स्नान करने आई एक महिला ने हादसे के बारे में बताया कि वह अपने चार साथियों के साथ स्नान के लिए आई थी, लेकिन अचानक मची भगदड़ में वे सभी इधर-उधर हो गए और अब उन्हें बताया गया कि उनके साथ आए सभी लोगों की मौत हो चुकी है। महिला का कहना है कि भगदड़ में वे भीड़ में दब गई थीं और जैसे-जैसे लोग एक-दूसरे के ऊपर चढ़ते गए, हालात बिगड़ते गए। महिला ने रोते हुए बताया कि अब वह अकेली रह गई है और उन्हें अपने खोए हुए लोगों का कोई सुराग नहीं मिल रहा है।
एक अन्य चश्मदीद ने बताया कि वह अपने माता-पिता और बच्चों के साथ महाकुंभ में स्नान करने आया था। भगदड़ में उसके माता-पिता और बच्चे दब गए। उसने बताया कि पहले वह किसी तरह भीड़ से निकला और फिर एक-एक कर अपने बच्चों और पिता को निकाला, लेकिन उसकी मां काफी नीचे दब गई। बाद में उसने अपनी मां को भी बाहर निकाला, लेकिन उनकी हालत बहुत खराब थी। उसने बताया कि अचानक भीड़ का बढ़ना और एक-दूसरे के ऊपर चढ़ने से भगदड़ मची, जिससे स्थिति नियंत्रण से बाहर हो गई। उसने कहा कि इस भगदड़ में 50 से 60 लोग दब गए हैं और कई लोगों की मौत भी हो गई है।
चित्रकूट से आए एक श्रद्धालु ने बताया कि वह अपने बहनोई के साथ महाकुंभ स्नान के लिए आया था। उन्हें संगम के तट पर पहुंचने से पहले ही प्रशासन ने रोक लिया और फिर धक्का-मुक्की शुरू हो गई। कुछ ही देर में भगदड़ मच गई और वह अपने बहनोई से बिछड़ गया। उसने बताया कि जब वह घटनास्थल पर लौटे तो वहां लाशें पड़ी थीं, उनके आसपास कपड़े और बैग थे, लेकिन उनके बहनोई का कोई पता नहीं चला। उन्होंने अस्पताल और मर्चुरी तक जाकर उन्हें तलाश किया, लेकिन कोई जानकारी नहीं मिली। वह परेशान है और प्रशासन से मदद की उम्मीद लगाए है।

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