Spread the love

दस साल चली ट्रायल के बाद जिला शिक्षाधिकारी दोषमुक्त
इन्दौर । विशेष न्यायाधीश (भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम) कमलेश सनोडिया की कोर्ट ने दस साल तक चली केस की ट्रायल के बाद निर्णय सुनाते जिले के तत्कालीन जिला शिक्षा अधिकारी किशोर शिंदे पर लोकायुक्त पुलिस द्वारा लगाए रिश्वत के आरोप से उन्हें दोषमुक्त कर दिया है। लोकायुक्त पुलिस गवाहों और साक्ष्यों के आधार पर कोर्ट में‍ किशोर शिंदे द्वारा रिश्वत लेने का आरोप सिद्ध नहीं कर पाई। इसके चलते सक्षम न्यायालय ने उन्हें दोषमुक्त करार दिया। अभियोजन कहानी संक्षेप में इस प्रकार है कि 12 दिसंबर 2015 को लोकायुक्त में फरियादी मोहनदास वैष्णव ने शिकायत की थी कि जगजीवन राम नगर स्थित उसके स्कूल के एक छात्र के पिता सुनील रायकवार ने जनसुनवाई में स्कूल के स्टाफ के खिलाफ उसके पुत्र के साथ मारपीट की शिकायत की जिसकी जांच जिला शिक्षा अधिकारी शिंदे को सौंपी गई। शिंदे ने शिकायत के निपटारे के लिए उनसे 50 हजार की रिश्वत मांगी जिसमें उसने तीस हजार रुपए उन्होंने दे दिए हैं बीस हजार बाकी है। शिकायत सत्यापन के बाद ट्रैप कार्रवाई करते लोकायुक्त की टीम ने शिंदे को शेष बीस हजार रुपए की रिश्वत लेते छावनी स्थित एक मल्टी में उनके फ्लैट से पकड़ा था। लेकिन दस साल चली केस की ट्रायल में लोकायुक्त उन पर आरोप सिद्ध नहीं कर पाई जिसके चलते कोर्ट ने आरोपी किशोर शिंदे को पचास हजार की रिश्वत मामले में दोषमुक्त करार दे दिया।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *