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दमोह। संत शिरोमणी आचार्य श्री 108 विद्यासागर जी महाराज का प्रथम समाधि दिवस देवाधिदेव 1008 श्री पार्श्वनाथ दिगम्बर जैन सिंघई-सेठ मंदिर दमोह में मनाया गया। इस अवसर पर विभिन्न धार्मिक कार्यक्रम आयोजित किए गए, जिनमें नृत्य, भजन, और आरती शामिल थे। इस कार्यक्रम में आचार्य श्री जी के जीवन की गौरव गाथा का प्रदर्शन “लाइट एण्ड साउंड एक्ट” के माध्यम से किया गया, जिसने सभी जन के मन मोहित तो किया, साथ ही इस मार्मिक प्रस्तुति ने सभी को भाव विभोर भी किया। आचार्य श्री विद्यासागर जी महाराज एक प्रमुख जैन संत के साथ जन संत भी थे, जिन्होंने अपने जीवन को धर्म और समाज सेवा में समर्पित किया। उन्होंने अनेक धार्मिक और सामाजिक कार्यों का नेतृत्व किया, जिनमें मंदिरों का निर्माण, स्वदेशी निर्माण हेतु हथकरघा संचालन, स्वास्थ्य सेवाओं में अनेक संस्थाओं का विकास, गौ सेवा और रक्षा हेतु अनेक गौ शालाएं, शिक्षा के क्षेत्र में प्रतिभास्थली एवं स्कूल और गरीबों की सहायता शामिल है। आचार्य श्री जी भारतीय शिक्षा में सुधार हेतु राष्ट्रीय नई शिक्षा नीति निर्माण में भी अहम भूमिका निभाई। इनका प्रयास सदैव हिंदी संस्कृति को जीवित रखने का और भारत को भारत कहने का रहा।नवमी तिथि के दिन 6 फरवरी को उनके प्रथम समाधि दिवस पर, संपूर्ण देश में जैन समुदाय द्वारा 1 फरवरी से 6 फरवरी तक समाधि दिवस के रूप में मनाया जा रहा है एवं समस्त जन उन्हें भावभीनी विनयांजलि अर्पित कर और उनके द्वारा दिखाए गए मार्ग पर चलने का संकल्प ले रहे हैं।इस कार्यक्रम में जिला जैन पंचायत के अध्यक्ष सुधीर जी सिंघई, वीर अरुण जी जैन, आचार्य विद्यासागर इंटरनेशनल स्कूल दमोह के प्राचार्य अमित जी जैन के मुख्य आतिथ्य में सभी भक्तों की उपस्थिति रही।

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