Spread the love

एक सप्ताह के भीतर जवाब दाखिल करें वरना हाजिर हों
जबलपुर । उच्च न्यायालय के न्यायाधीश विशाल मिश्रा की एकलपीठ ने ओंकारेश्वर बांध से प्रभावित किसानों के वयस्क पुत्रों को पुनर्वास पैकेज और लाभ नहीं दिए जाने से जुडे मामले में सुनवाई के दौरान नर्मदा घाटी विकास प्राधिकरण की लापरवाही और न्यायालयीन आदेशों की अनदेखी पर सख्त रुख अपनाते हुए मामले में अपर मुख्य सचिव डॉ. राजेश राजोरा को हिदायत दी है कि या तो एक सप्ताह के भीतर जवाब दाखिल करें, वरना व्यक्तिगत रूप से न्यायालय में पेश हों।
नर्मदा बचाओ आंदोलन की ओर से आलोक अग्रवाल की ओर से दायर अवमानना याचिका में कहा गया है कि उच्च न्यायालय ने 29 नवंबर 2024 को जारी आदेश दिया था कि प्रभावित किसानों के वयस्क पुत्रों को पैकेज और पुनर्वास लाभ देने पर दो महीने के भीतर फैसला लिया जाए। लेकिन उक्त आदेश के बावजूद सरकार ने महज सितंबर 2025 में सुनवाई की और उसके बाद फाइल दबा दी गई। सात महीने बीत जाने के बाद भी अंतिम आदेश जारी नहीं हुआ। याचिकाकर्ताओं का कहना है कि वर्ष 2013 के विशेष पैकेज और सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों के अनुसार बांध प्रभावित किसानों के वयस्क पुत्रों को भी भूमिहीनों की तरह 2.5 लाख का विशेष पैकेज, 15 प्रतिशत वार्षिक ब्याज, पुनर्वास लाभ दिया जाना चाहिए।
बुधवार को हुई मामले की सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ता की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता मनोज शर्मा और अधिवक्ता प्रजस भट्टी ने पक्ष रखा। सुनवाई के बाद न्यायालय ने स्पष्ट कहा कि यदि एक सप्ताह के भीतर नर्मदा बचाओ आंदोलन के ज्ञापन पर अंतिम निर्णय लेकर जवाब प्रस्तुत नहीं किया गया, तो एसीएस डॉ. राजेश राजोरा को स्वयं अदालत में उपस्थित होकर जवाब देना होगा।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *