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प्रशासन की ढिलाई या संरक्षण का खेल

गांव-गांव, गली-मुहल्ले में बिक रही अवैध शराब

भारती अहिरवार
हटा/– दमोह जिले के गैसाबाद थाना क्षेत्र अंतर्गत ग्राम हिनौता, मुराछ और मुहरई व दर्जनांें गांवों में अवैध शराब का कारोबार दिन रात फल-फूल रहा है, गांव गांव में नशा बिक रहा है।
यहॉं तक कि मुहरई गांव के पी.एम. श्री शासकीय हाईस्कूल के बाजू से भी अवैध शराब बिक रही है, जिसका असर स्कूल के छात्रों पर भी पड़ रहा है। आपको बता दें कि गैसाबाद क्षेत्र एक विकसित क्षेत्र है लेकिन अवैध शराब हजारों गरीब परिवार को एक नरक की दुनिया में ले जा रही है। गली मुहल्ले से लेकर ढाबे तक देशी और अंग्रेजी शराब की बिक्री खुलेआम हो रही है। इस पर समय समय पर पुलिस और विभागीय कार्यवाही तो जरूर होती है लेकिन इन कार्यवाही का प्रभाव सीमित नजर आता है। गरीबों के लिए आशियाने अभी ठीक से बसे भी नही कि उनकी गृहस्थी में काल और अशांति की अवैध शराब की दुकान, शराब के ठेकेदार ने अपने रसूख के दम पर जगह जगह खोल दीं और अपना कर्मचारी बैठा दिया है। बेधडक देशी शराब के साथ साथ अंग्रेजी तथा अवैध शराब कारोबार कर बकायदा ऑनलाईन और ऑफलाईन बिक रही है।

अवैध शराब कारोबारियों पर क्यों नहीं हो रही कार्यवाही

स्थानीय लोगों का कहना है कि पुलिस की कार्यवाही छोटे छोटे लोगों तक ही होती है जब कि बढे अवैध शराब कारोबारी प्रशासन की पकढ से दूर हैं। इसके चलते कई लोग थाने और आबकारी विभाग पर संरक्षण देने का आरोप भी लगा रहे हैं। शाम होते ही शराब के अवैध अड्डों पर ग्राहकों की भीड़ इस सिथति की गंभीरता को दर्शाती है।

नशे की चपेट में युवा और महिलायें

यह स्थिति न कि परिवारों में अशांति व हिंसा बड़ा रही है बल्कि युवा पीढि और महिलाओं को भी नशे की लत की ओर ढकेल रही है। इससे सामाजिक बुराईयां और अपराधों में भी इजाफा हो रहा है। शराब के नशें के कारण अनेकों घर और परिवार टूटने की कगार पर आ चुके हैं और कई परिवार तो बिखर भी चुके है। अनेको परिवार के लोग शराब नशें करने के कारण कर्ज में डूबकर अपने गांव से पलायन करने को मजबूर होते हैं।

समस्या का कैसे होगा समाधान

आमजन और प्रशासन के बीच समन्वय और दृढता से कार्यवाही की जरूरत है। जब तक अवैध शराब कारोबारियों पर शिकन्जा नहीं कसा जाता है तब तक यह समस्या जस की तस बनी रहेगी। अब देखना यह है कि गैसाबाद थाना क्षेत्र में अवैध शराब और नशीले पदार्थों के खिलाफ निर्णायक कार्यवाही कब और कैसे होती है। क्या प्रशासन इन सामाजिक बुराईयों को खत्म करने में सफल होगा या फिर बुराईयां यूं ही बढ़ती रहेगी।

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