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नई दिल्ली। सुप्रीम कोर्ट ने एक मामले में कहा है कि आत्महत्या के लिए उकसाने का अपराध साबित करने के लिए उत्पीड़न इतना गंभीर होना चाहिए कि पीड़ित के पास कोई और विकल्प न बचे। यह कहकर सुप्रीम कोर्ट के चीफ जस्टिस संजीव खन्ना की अगुवाई वाली बेंच ने आत्महत्या के लिए उकसाने के मामले में आरोपी के खिलाफ चल रहे केस को खारिज कर दिया।
सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि केवल उत्पीड़न का आरोप पर्याप्त नहीं होता, बल्कि यह साबित होना चाहिए कि उत्पीड़न के कारण मृतक के पास आत्महत्या के अलावा कोई और विकल्प नहीं था। सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि यह साबित करना आवश्यक है कि अभियुक्त ने मृतक को आत्महत्या के लिए उकसाया या मदद की। इसी के साथ मामले में सुप्रीम कोर्ट ने यूपी के डीजीपी को निर्देश दिया है कि वह एसआईटी का गठन करें और आत्महत्या के लिए क्या असल वजह है उसकी जांच कराई जाए।
मामला यूपी के सहारनपुर का है। याचिकाकर्ता ने 2 नवंबर 2022 को शिकायत की थी कि उनके बेटे को कुछ लोगों ने पीटा, जिस कारण उसकी मौत हो गई। मामला अपीलकर्ता के बेटे जियाउल रहमान (मृतक) और शिकायतकर्ता की चचेरी बहन (मृतक) के बीच संबंध की शंका से शुरू हुआ था। सुप्रीम कोर्ट में याचिकाकर्ता ने कहा कि लड़की के रिश्तेदारों ने उनके बेटे को पीटा, जिससे उसकी मौत हो गई थी। इसके बाद याचिकाकर्ता ने कथित तौर पर लड़की को अपमानित और प्रताड़ित किया था। बेटे की मौत का दोष लड़की पर मढ़ दिया, जिसके बाद लड़की ने दुखी होकर आत्महत्या कर ली। इसके बाद लड़की के रिश्तेदारों की ओर से लड़के के पिता के खिलाफ आत्महत्या के लिए उकसाने का केस दर्ज कराया गया। इसी मामले में लड़के के पिता ने सुप्रीम कोर्ट से राहत की गुहार लगाई थी। मामले में इलाहाबाद हाई कोर्ट ने पहले याचिका खारिज कर दी थी, जिसके बाद मामला सुप्रीम कोर्ट आया।
सुप्रीम कोर्ट का आदेश बनेगा नजीरसुप्रीम कोर्ट ने कहा था कि आत्महत्या के लिए उकसाने (आईपीसी की धारा-306 यानी बीएनएस की धारा- 108) के मामले को मैकेनिकल तौर पर नहीं लगाया जा सकता है। जांच एजेंसियों को धारा 306 आईपीसी के तहत दिए गए कानून के प्रावधानों के प्रति संवेदनशील बनाया जाना चाहिए ताकि लोगों को अनुचित और बेबुनियाद अभियोजन प्रक्रिया का सामना न करना पड़े। शीर्ष अदालत ने ट्रायल कोर्ट से भी आग्रह किया कि वे मैकेनिकली मामले में आरोप तय न करें। मौजूदा केस में भी सुप्रीम कोर्ट ने जो व्यवस्था दी है वह नजीर बनेगा।

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