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जबलपुर। हाई कोर्ट के न्यायमूर्ति विवेक अग्रवाल की एकलपीठ ने एक भी अपराध में सजा न मिलने के बावजूद जिला बदर का आदेश जारी किए जाने के रवैये पर आश्चर्य जताया। इसी के साथ न केवल कलेक्टर छिंदवाड़ा द्वारा जारी अनुचित जिला बदर आदेश को निरस्त कर दिया बल्कि सरकार पर 25 हजार का जुर्माना भी लगा दिया। यह राशि याचिकाकर्ता के बैंक खाते में जमा कराने के निर्देश दिए गए हैं।
याचिकाकर्ता छिंदवाड़ा निवासी भूरा कौरव की ओर से दलील दी गई कि कलेक्टर ने 30 अक्टूबर, 2024 को याचिकाकर्ता के विरुद्ध जिला बदर का आदेश पारित किया था। पुलिस ने अपनी रिपोर्ट में कहा था कि याचिकाकर्ता के विरुद्ध 14 आपराधिक प्रकरण पंजीबद्ध हैं। वास्तव में ये सभी मामले काफी पुराने हैं। कुछ मामलों में वह दोषमुक्त भी हो चुका है और कुछ जुआं आदि से संबंधित हैं। दिलचस्प बात तो यह है कि जिला बदर का आदेश जारी करने के पहले एक भी गवाह के बयान दर्ज नहीं किए गए। सुनवाई के बाद हाई कोर्ट ने कलेक्टर का आदेश मनमाना पाकर निरस्त कर दिया।

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