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किसानों के खातों की राशि परिजनों के खातों में डाली
इन्दौर। विशेष न्यायाधीश (भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम) संजीव कटारे की कोर्ट ने सेन्ट्रल बैंक ऑफ इंडिया में हुई करोड़ों रुपये की वित्तीय अनियमितताओं और खाताधारकों के साथ धोखाधड़ी के आरोपी तत्कालीन बड़ावदा शाखा प्रबंधक नेविल कावराना को दोषी करार देते हुए चार वर्ष के सश्रम कारावास और अर्थदंड की सजा सुनाई है। कोर्ट ने ईओडब्ल्यू उज्जैन के विशेष प्रकरण में यह फैसला सुनाते प्रकरण के अन्य सहआरोपियों को साक्ष्यों के अभाव में दोषमुक्त कर दिया। प्रकरण में अभियोजन पैरवी विशेष लोक अभियोजक कृष्णकांत चौहान ने की। अभियोजन कहानी संक्षेप में इस प्रकार है कि सेन्ट्रल बैंक ऑफ इंडिया की बड़ावदा शाखा में वर्ष 2012 से 2014 के बीच पदस्थ रहते हुए तत्कालीन शाखा प्रबंधक नेविल कावराना ने अपने पद का दुरुपयोग कर सुनियोजित तरीके से बैंक में वित्तीय अनियमितताएं की थीं। इस पूरे मामले का खुलासा उनके स्थानांतरण के बाद शाखा में पदस्थ हुए नए शाखा प्रबंधक सुमित जैन की आंतरिक जांच में हुआ था। जांच में यह भी सामने आया था कि खातों से निकाली गई राशि से फसल बीमा कंपनियों और शासकीय राजस्व मद के नाम पर डिमांड ड्राफ्ट तैयार किए जाते थे। इनमें चोलामंडलम एमएस इंश्योरेंस, एलआईसी ऑफ इंडिया तथा तहसीलदार के नाम से ड्राफ्ट बनाए गए, लेकिन उन्हें संबंधित संस्थाओं तक भेजने के बजाय आरोपी स्वयं बैंकिग सिस्टम में उन्हें निरस्त कर देता था। और डिमांड ड्राफ्ट निरस्त होने के बाद संबंधित राशि आरोपी अपनी पत्नी खुर्शीद खोखरी कावराना, रिश्तेदार यास्मीन कावराना, गुलनार कावराना, जिमी खोखरी, शहजाद तथा मेहता बिजनेस फैसिलिटेटर के देवेन्द्र सांड और उसकी पत्नी प्रीति सांड के खातों में ट्रांसफर कर अवैध लाभ उठाता था। मामला उजागर होने के बाद बैंक प्रबंधन ने मामले में ईओडब्ल्यू को शिकायत दर्ज कराई जिस पर कार्रवाई करते ईओडब्ल्यू ने नेविल कावराना के खिलाफ भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम, 1988 की धारा 7 तथा धारा 13 (1) (क) (ख) तथा भारतीय दंड संहिता की धारा 120-बी और धारा 409 के तहत मामला दर्ज कर कार्रवाई करते प्रकरण चालान कोर्ट में पेश किया जहां सुनवाई उपरांत सक्षम न्यायालय ने भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम और भारतीय दंड संहिता की विभिन्न धाराओं में दोषसिद्धि दर्ज करते हुए आरोपी को जेल भेजने के आदेश दिए।

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