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अगली सुनवाई में वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से अनिवार्य रूप से उपस्थित रहें सीबीडीटी चेयरमैन

जबलपुर। उच्च न्यायालय के न्यायाधीश विवेक अग्रवाल तथा न्यायाधीश अवनीन्द्र कुमार सिंह की संयुक्तपीठ ने केंद्रीय प्रत्यक्ष कर बोर्ड (सीबीडीटी) के चेयरमैन रवि अग्रवाल के रवैये पर कड़ी नाराजगी व्यक्त करते हुए स्पष्ट कहा कि देश में कोई भी व्यक्ति, चाहे वह सीबीडीटी चेयरमैन ही क्यों न हो, अदालत से ऊपर नहीं है। संयुक्तपीठ ने इस मत के साथ चेयरमैन की व्यक्तिगत उपस्थिति से छूट देने की मांग खारिज करते हुए उन्हें 15 जुलाई को होने वाली अगली सुनवाई में वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से अनिवार्य रूप से उपस्थित होने के निर्देश दिए हैं।
जबलपुर के आयकर अधिकारी सुधीर कुमार गुप्ता की ओर से दायर याचिका में याचिकाकर्ता ने अपने खिलाफ भ्रष्टाचार के मामले में अभियोजन स्वीकृति दिए जाने के निर्णय को चुनौती दी है। लोकायुक्त सागर ने उनके खिलाफ भ्रष्टाचार का मामला दर्ज किया था। इस मामले में पूर्व में उच्च न्यायालय ने सीबीडीटी चेयरमैन से शपथपत्र मांगकर पूछा था कि जब पहले अभियोजन की मंजूरी देने से इनकार किया गया था, तो बिना किसी नए साक्ष्य के बाद में मंजूरी कैसे दे दी गई? इस विरोधाभास के लिए जिम्मेदार कौन है?
आदेश के परिपालन में सीबीडीटी की ओर से शपथपत्र दाखिल किया गया परंतु न्यायालय ने इसें संतोषजनक नहीं माना था। इसके बाद उच्च न्यायालय ने चेयरमैन रवि अग्रवाल को वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से स्वयं उपस्थित होकर जवाब देने का निर्देश दिया था। मंगलवार को मामले पर हुई सुनवाई के दौरान चेयरमैन की ओर से अंतरिम आवेदन प्रस्तुत कर कहा गया कि चूंकि वह अपना पद छोड़ रहे हैं, इसलिए वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए भी उपस्थित नहीं हो सकेंगे। इस पर संयुक्तपीठ ने कड़ी आपत्ति जताते हुए कहा कि सवाल सीधे उस हलफनामे से जुड़े हैं, जिसे स्वयं चेयरमैन ने दायर किया है। लिहाजा उनका उपस्थित रहना आवश्यक है। केवल पद छोड़ने का आधार उन्हें न्यायालय के समक्ष उपस्थित होने के दायित्व से मुक्त नहीं कर सकता। न्यायालय ने स्पष्ट कहा कि देश में कोई भी व्यक्ति अदालत से ऊपर नहीं है।
इसके साथ ही संयुक्तपीठ ने सीबीडीटी चेयरमैन की हाजिरी माफी का आवेदन खारिज करते हुए निर्देश दिया कि 15 जुलाई को होने वाली अगली सुनवाई में वर्तमान चेयरमैन रवि अग्रवाल वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से उपस्थित होकर अपना पक्ष रखें। न्यायालय ने उनके उत्तराधिकारी को भी सुनवाई में वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए शामिल होने के निर्देश दिए हैं।

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