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लोकसभा में भाजपा सांसद ने की अवैध उत्खनन की पुष्टि – मुकेश नायक
भोपाल। प्रदेश कांग्रेस मीडिया विभाग के अध्यक्ष मुकेश नायक ने पत्रकार वार्ता को संबोधित करते हुये कहा कि नर्मदा नदी, जिसे मध्य प्रदेश और गुजरात की जीवन रेखा कहा जाता है वह आज गंभीर पर्यावरणीय असंतुलन और संकट से जूझ रही है। अमरकंटक से खंभात की खाड़ी तक फैली इस नदी का ईको सिस्टम बिगड़ रहा है, जिससे इसके अस्तित्व पर संकट मंडरा रहा है। विशेषज्ञों के अनुसार, नदी का जल स्तर गिर रहा है, जल की गुणवत्ता खराब हो रही है, और मानवीय उपयोग के लिए अनुपयुक्त बनती जा रही है। अवैध उत्खनन और अन्य मानवीय गतिविधियों के कारण नर्मदा का पारिस्थितिकी तंत्र नष्ट हो रहा है, जिससे नदी के प्रवाह में परिवर्तन आ रहा है।
श्री नायक ने कहा कि भाजपा के सांसद दर्शनसिंह चौधरी ने नर्मदा नदीं के ईकों सिस्टम, पानी की गुणवत्ता, टूटते किनारों, उसके प्रवाह और अवैध उत्खनन को लेकर गंभीर सवाल लोकसभा में उठाये, अभी तक हम लोग जब अवैध उत्खनन की बात करते थे तो भाजपा के लोग इस पर प्रलाप करते थे, वे वहीं बात कह रहे हैं जो हम लोग कहते चले आ रहे हैं। अब विपक्ष ही नहीं सत्तापक्ष के लोग भी नर्मदा में अवैध उत्खनन पर सवाल उठा रहे हैं। पूरे नर्मदा वैली अमरकंटक से लेकर खंभात की खाड़ी तक 1200 किलोमीटर का जो नर्मदा नदी का ऐरिया भूकंप की दृष्टि से भूगर्भ शास्त्रियों ने सबसे ज्यादा संवेदनशील बताया और चेतावनियां दी कि जब भी भूगर्भ में हलचल होगी, तब सबसे बड़ी मानवीय त्रास्दी का सामना देश को करना पड़ेगा। पूरी नदीं के ईको सिस्टम पर बड़ा प्रभाव पड़ा है। मा. नर्मदा का उद्गम स्थल का प्रवाह सुसुप्त अवस्था में जा रहा है, नर्मदा की जीवन रेखा में दो प्रभाव देखने को मिल रहे हैं, जिसमें नर्मदा की 25 सहायक नदिया हिरण, बेतवा, केन, कैथ और कोपरा जैसी प्रमुख नदियां पूरी तरह से सूख गई हैं।
श्री नायक ने कहा कि अवैध उत्खनन अंधाधुंध मानवीय दुरूपयोग के कारण नर्मदा नदी ने अपना ईको सिस्टम, अपनी गुणवत्ता समाप्त हो चुकी है। जैव संरक्षण का सबसे महान पुण्य नर्मदा सृजित करती है, जैव विविधता को भी एक तरह का खतरा उत्पन्न हो चुका है। अवैध उत्खनन के कारण नर्मदा नदी की अनेक सहायक नदियों का प्रभाव भी समाप्त हो रहा है। पन्ना, होशंगाबाद, छतरपुर जिले से एक-एक करोड़ का प्रतिदिन अवैध उत्खनन हो रहा है, एक से डेढ करोड़ का अवैध उत्खनन चंबल नदी से हो रहा है। इस तरह एक से डेढ हजार करोड़ का अवैध उत्खनन इन चार स्थानों से हो रहा है। इतना गरीब प्रदेश जो हर महीने कर्ज लेकर अपनी स्थापना का खर्च निकालकर कर्मचारियों को वेतन दे पा रहा है, वह केवल डेढ हजार करोड़ का केवल रेत में रेवेन्यू लीकेज मप्र में कितना बड़ी राजस्व की हानि हैं, यह कल्पना से परे हैं।
श्री नायक ने कहा कि बड़े-बड़े नेता भोपाल की नाक के नीचे नर्मदापुरम, छतरपुर और चंबल में राजनीति करते हैं, में आरोप लगाता हूं कि इन नेताओं के संरक्षण में रेत का अवैध उत्खनन हो रहा है, रेवेन्यु को नुकसान हो रहा है और अपने निजी लाभ के लिए अवैध उत्खनन को संरक्षण दे रहे हैं और इसका लाभ उठा रहे हैं। नदी से रेत उठाने वाले नेताओं की संपत्ति को लेकर कांग्रेस ने सर्वे किया है, कहां कहां धन का नियोजन किया, कितने मकान, बड़े-बड़े रिसार्ट, बंगले, स्वीमिंग पुल इन नेताओं ने अवैध उत्खनन से बनाया है। कांग्रेस आने वाले समय में इसका खुलासा करेगी। नर्मदा नदी को बचाने के लिए अवैध उत्खनन पर सख्त प्रतिबंध, जल संरक्षण उपायों का क्रियान्वयन और नदियों के पुनर्जीवन की दिशा में ठोस कदम उठाने होंगे।

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