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झाबुआ । आदिम जाति सेवा सहकारी संस्था मे लोकसेवक के रूप में कार्यरत रहते हुए एक कर्मचारी को मनमाने तरीके से अन्य जिम्मेदारी सौंप कर उससे रिश्वत के रूप में धनराशि लेते हुए पकड़े गए आरोपी तेजसिंह भूरिया को विशेष न्यायाधीश, (भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम) झाबुआ आर.के. शर्मा द्वारा आज शुक्रवार को निर्णय देते हुए धारा 7, धारा 13 (1) डी, सहपठित धारा 13 (2) भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम 1988 के तहत 4 वर्ष के सश्रम कारावास एवं 10,000/- रूपये के अर्थदंड से दंडित किया गया।उक्त प्रकरण में आज दिए गए न्यायालयीन फैसले के संबंध में मिली जानकारी अनुसार आरोपी तेरसिंह दिनांक 20.11.2017 से दिनांक 13.12.2017 तक आदिम जाति सेवा सहकारी संस्था मर्यादित देवझिरी जिला झाबुआ के अध्यक्ष पद पर लोकसेवक के रूप में कार्यरत रहते हुए आरोपी तेरसिंह द्वारा आवेदक कमलसिंह निनामा के पक्ष में दिनांक 20.11.2017 को आदेश जारी कर आवेदक की पदस्थापना संस्था के वसूली कार्य एवं प्रबंधक द्वारा सौंपे गए कार्य से बदलकर देवझिरी एवं नवागांव की दुकानों का संचालन करने एवं साथ ही रासायनिक खाद वितरण करने हेतु पदस्थ किया गया था, किंतु आरोपी तेरसिंह द्वारा आवेदक को चार्ज नहीं दिया जा रहा था एवं चार्ज देने के एवज में आवेदक से 20,000/-रू. रिश्वत की अवैध रूप से मांग की गई, और 5,000/-रू. प्रतिमाह रिश्वत देने को कहा गया, जिसके एवज में आरोपी ने 5,000/-रू. उसी समय ले लिये थे। शेष 15,000/ रूपए जेल चौराहा झाबुआ पर चाय की गुमटी के पास देना तय किया गया था, तभी उसे आवेदक से रिश्वत की राशि लेते हुए रंगे हाथों पकड़ लिया गया। उक्त प्रकरण पर थाना विपुस्था भोपाल पर अपराध क्रमांक 287/2017 के अंतर्गत अपराध पंजीबद्ध कर विवेचना में लिया गया। उक्त प्रकरण में विशेष न्यायाधीश, (भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम) झाबुआ आर.के. शर्मा द्वारा आज दिनांक 14.02.2025 को निर्णय देते हुए आरोपी तेरसिंह भुरिया को धारा 7, धारा 13 (1) डी, सहपठित धारा 13 (2) भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम 1988 के तहत 4 वर्ष के सश्रम कारावास एवं 10,000/- रूपये के अर्थदंड से दंडित किया गया।

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