
ग्वालियर। हाईकोर्ट की ग्वालियर खंडपीठ ने अशोकनगर के कलेक्टर को पिछले 10 वर्षों में आदिवासियों की जमीन खरीदने और बेचने के मामलों की जांच के आदेश दिए हैं। हाईकोर्ट ने अपने आदेश में आदिवासी की जमीन यदि अन्य समुदाय ने खरीदी है। उसकी जांच करके दो सप्ताह के अंदर रिपोर्ट देने के लिए आदेशित किया है।
अशोक नगर जिले के दबंगों द्वारा आदिवासियों की जमीन हड़पी जा रही है। आदिवासियों को बंधक बनाकर अथवा कर्ज देकर आदिवासियों की जमीन बेचने के लिए आदिवासियों को डराया धमकाया जा रहा है।
अकलोन के ईसागढ़ की 8 हेक्टेयर जमीन का मामला हाई कोर्ट पहुंचा है। मंगलवार को हाईकोर्ट में सुनवाई हो रही थी। मुन्नी बाई का आरोप था, उसके पति छोटेलाल को गांव के पूर्व सरपंच ने बंधुआ मजदूर बनाकर रखा है। मेरे नाम की जमीन की रजिस्ट्री करने के लिए दबाव बनाया है। महिला की याचिका पर हाईकोर्ट ने उसके पति को हाईकोर्ट में पेश करने के आदेश पुलिस को दिए।
छोटेलाल को 4 बजे अशोकनगर की पुलिस, कोर्ट रूम में लेकर आ गई थी। उसी समय पूर्व सरपंच रंधावा और उसके साथी गौरव शर्मा छोटेलाल ने अपहरण हाईकोर्ट के कोर्ट रूम से करने की कोशिश की।जिसे न्यायमूर्ति आनंद ने देख लिया। उन्होंने तुरंत कार्रवाई करते हुए गौरव शर्मा और रंधावा को कोर्ट रूम से बाहर करवाया।छोटे लाल को हाजिर करवाया।
हाईकोर्ट ने दोनों पक्षों को सुनने के बाद अशोकनगर के कलेक्टर और एसपी को आदेश दिया है। मुन्नी बाई को संरक्षण प्रदान किया जाए। अंतिम आदेश होने तक जमीन के पंजीयन पर रोक लगाई है। मुन्नी बाई और छोटेलाल को सुरक्षा प्रदान करने के आदेश पुलिस को दिए।दो सप्ताह के अंदर आदिवासियों की जमीन बेचे जाने के मामले की जांच की रिपोर्ट पेश करने के आदेश दिए हैं।
