Spread the love

झाबुआ। दूर के रिश्ते में होने वाली अपनी ही मासूम नाबालिग बहीन को दुष्कर्म का शिकार बनाने वाले आरोपित को विशेष अपर सत्र न्‍यायालय (पॉक्‍सो एक्‍ट) झाबुआ द्वारा दुष्कर्म का दोषी पाते हुए पाक्सो एक्ट सहित भारतीय दंड संहिता की विभिन्न धाराओं के तहत आजीवन सश्रम कारावास सहित रू.14000/- अर्थदण्‍ड से दण्डित किया गया है। करीब नो वर्षिय नाबालिग को दुष्कर्म का शिकार बनाने वाला आरोपित पीड़िता का बुआ का लड़का भाई है। घटना के बाद पीड़िता की मां द्वारा थाना कोतवाली जाकर रिपोर्ट दर्ज कराई गई थी।उक्त न्यायालयीन फैसले के संबंध में जानकारी देते हुए सहायक जिला लोक अभियोजन अधिकारी श्रीमति शीला बघेल ने बताया कि दिनांक 16.04.2023 को फरियादियां ने कोतवाली थाना में रिपोर्ट दर्ज कराई कि बीती रात को मै व मेरा पति पीड़िता बालिका सहित दो अन्य भाई बहनों को घर के बाहर सुलाकर हम दोनो घर के पीछे खेत मे सोने चले गये थे। सुबह मेरी लड़की पीडिता जो कक्षा 3 में पढ़ती है, वह रोते-रोते हमारे पास आई, जिसको चेहरे पर सिर में चोटे लगी थी। जब मैंने उसे पूछा कि क्या हुआ और ये चोटे कैसे लगी तो लड़की रोते हुए बोली की बुआ का लड़का सादू रात को मुझे उठाकर कोतेड़ा तरफ ले गया और और मेरे साथ गलत काम किया व उसने मुझे मारा। फरियादिया ने दर्ज कराई रिपोर्ट में बताया कि आरोपित मेरी ननद का लडका है, और वह हमारे यहां पर करीबन 10-15 दिन से रह रहा था। उक्त दर्ज कराई गई प्रथम सूचना रिपोर्ट के आधार पर भारतीय दंड विधान की धारा- 363, 323, 376 (2) (च), 376 (ए, बी) एवं पाक्सो एक्ट की धारा 5 (एम)/6, 5 (एन)/6 पाक्सो एक्ट के तहत प्रकरण पंजीबद्ध कर विवेचना में लिया गया तथा अनुसंधान अधिकारी द्वारा शेष आवश्‍यक अनुसंधान पूर्ण कर अभियोग पत्र माननीय न्‍यायालय में प्रस्‍तुत किया ।

एडीपीओ के अनुसार, विचारण के दौरान माननीय न्यायाधीश विशेष अपर सत्र न्‍यायालय (पॉक्‍सो एक्‍ट) झाबुआ, द्वारा निर्णय पारित करते हुए आरोपी सादू पुत्र राजु उर्फ राजिया मैडा उम्र 19 वर्ष निवासी मलवान झाबुआ को दोषी पाते हुए भारतीय दंड विधान की धारा 363 में 3 वर्ष का सश्रम कारावास एवं रू.1000/- अर्थदण्‍ड, धारा 366 में 5 वर्ष का सश्रम कारावास एवं रू.2000/- अर्थदण्‍ड, धारा 323 में 1 वर्ष का सश्रम कारावास एवं रू.1000/- अर्थदण्‍ड, तथा पाक्सो एक्ट की धारा 5 (एम)/6, 5 (एन)/6 पाक्सो एक्ट में आजीवन सश्रम कारावास जिसका अभिप्राय शेष प्राकृत जीवनकाल के लिये कारावास से एवं रू.5000/- अर्थदण्‍ड से दण्डित किया गया है।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *