
कुशल कार्यशैली के लिये हमेशा याद किये जाएंगे सबके चहेते बड्डे
जबलपुर। जबलपुर में पुलिस प्रेस और पब्लिक के बीच सेतू का काम करने वाले कर्तव्य परायण व निष्ठावान कंट्रोल रूम प्रभारी बड्डे के नाम से लोकप्रिय रविन्द्र सिंह अब इस दुनिया में नहीं रहे. विश्वास ही नहीं होता की सिंह परिवार पर 15 दिन के अंदर दूसरा वज्रपात हुआ. अभी 15 दिन पहले ही उनकी माता जी का निधन हुआ था. रविन्द्र सिंह को ज्वांडिस बिगड़ जाने के कारण चार दिन पहले ही नागपुर के मीडाज हास्पिटल में भर्ती कराया गया था. जहां 15 मार्च की सुबह 6 बजे उन्होंने अंतिम सांस ली. हर दिल अजीज रविन्द्र सिंह की कार्यशैली के कारण तमाम आईपीएस अधिकारियों की वह पहली पसंद होते थे. कंट्रोल रूम से किसी भी विषम परिस्थिति जिले को अच्छे ढ़ग से कंट्रोल करने उन्होंने महारत हासिल की थी. पुलिस के मुखबिर तंत्र के वे अच्छे ज्ञाता थे, गुप्त सूचनाओं के आधार पर वे परिस्थितियों से अधिकारियों को अवगत कराकर विपरीत परिस्थितियों को कानून व्यवस्था के अनुकूल बनाने में दक्ष थे. महज 59 साल की उम्र में अल्प बीमारी के दौरान उनका निधन जिला पुलिस बल के लिये एक अपूर्णीय क्षति है. उनके निधन का समाचार आते ही पूरे पुलिस विभाग में शोक की लहर छा गई और पुलिस विभाग का होली मिलन कार्यक्रम निरस्त कर दिया गया. उनकी कार्यशैली ने उन्हें हर वर्ग के लोगों में एक विशेष स्थान दिलाया था।
रवीन्द्र सिंह का अंतिम संस्कार रविवार को पुलिस सम्मान सलामी के साथ किया गया, जिसमें उनकी सामाजिक प्रतिष्ठा का उत्कृष्ट उदाहरण देखने को मिला। इस अंतिम विदाई में न केवल पुलिस अधिकारी और नेता, बल्कि व्यापारी, पत्रकार और शहर के हर वर्ग के लोग शामिल हुए थे। श्मशान भूमि पर हर आंख नम थी, और उनके योगदान को याद करते हुए उनकी आत्मा की शांति के लिए प्रार्थनाएं की जा रही थीं।
शोक सभा में रवीन्द्र सिंह के व्यक्तित्व को लेकर कई बातें साझा की गईं, जो उनके जिंदादिली और समर्पण को उजागर करती थीं। उनके निधन से न केवल पुलिस विभाग, बल्कि समस्त शहर शोक में डूबा हुआ था।
रवीन्द्र सिंह ने अपने अंतिम दिनों में भी उसी अंदाज में विदाई ली, जैसे वे जीवन में जिंदादिली और समर्पण के प्रतीक बने हुए थे।
