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दमोह । जिले में रोकथाम योग्य मातृ-मृत्यु को निरंक करने के प्रयासों में कलेक्टर एवं जिला स्वास्थ्य समिति अध्यक्ष सुधीर कुमार कोचर द्वारा मातृ-मृत्यु प्रकरण को संज्ञान में लेकर हर मातृ-मृत्यु प्रकरण की गहन समीक्षा सतत् रूप से की जा रही है। इस क्रम में गत दिवस विकासखंड हटा एवं विकासखंड बटियागढ़ में हुई मातृ मृत्यु के प्रकरण की समीक्षा कलेक्ट्रेट सभागार में संबंधित महिला के परिजनों, चिकित्सकों, संबंधित सी.बी.एम.ओ., जिला चिकित्सालय नर्सिंग स्टॉफ, मैदानी सेवा प्रदाताओं की उपस्थिति में की गई।

            बैठक दौरान कलेक्टर श्री कोचर ने संबंधित महिला के परिजनों से संबंधित महिला को मैदानी स्वास्थ्य अमला एवं संस्था पर प्रदायित स्वास्थ्य सेवा के संबंध में विस्तारपूर्वक जानकारी प्राप्त की गई। विकासखंड हटा के गैसाबाद निवासी शायबा बी/फारूक खान उम्र 21 वर्ष की मातृ-मृत्यु समीक्षा दौरान जिला चिकित्सालय की स्टॉफ नर्स की स्वेच्छाचारिता पाये जाने पर निलंबन की कार्यवाही की। इस दौरान मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी, सिविल सर्जन सह मुख्य अस्पताल अधीक्षक, जिला स्वास्थ्य अधिकारी मौजूद रहे। कलेक्टर श्री कोचर ने विकासखंड हटा के गैसाबाद निवासी शायबा बी/फारूक खान उम्र 21 वर्ष की मातृ-मृत्यु समीक्षा दौरान संबंधित महिला की केस शीट का बारीकी से अवलोकन किया। समीक्षा दौरान पाया कि चिकित्सीय स्वास्थ्य परीक्षण में एलएससीएस का केस होने के बावजूद स्टॉफ नर्स द्वारा अपनी मर्जी से नार्मल डिलेवरी कराई गई। जिससे अत्याधिक रक्त स्त्राव होने से संबंधित महिला में जान का जोखिम बढा। स्टॉफ नर्स निशा शुक्ला द्वारा स्वेच्छाचारिता कृत्य पर निलंबन की कार्यवाही की गई। वहीं अन्य स्टॉफ नर्स क्रमशः ज्योति साहू, आशा अब्राहम एवं शीतल साहू को प्रसव कक्ष से पृथक कर अन्य इकाई में कार्य करने हेतु निर्देशित किया गया।

            शायबा बी/फारूक खान का पहला प्रसव था। मैदानी स्वास्थ्य अमले द्वारा समय-समय पर स्वास्थ्य जांच-देखभाल की जाती रही। संबंधित महिला को सिविल अस्पताल हटा में 9 मार्च को स्वास्थ्य परीक्षण दौरान जोखिम पूर्ण स्वास्थ्य स्थिति होने पर जिला चिकित्सालय रेफर किया गया। जहां स्त्री रोग विशेषज्ञ द्वारा स्वास्थ्य परीक्षण किया गया। गर्भाशय संकुचन 1 से.मी. होने अर्थात संबंधित महिला प्रसव पीड़ा के सक्रिय चरण में नहीं होने पर उसे प्रसव पीड़ा पर निगाह रखने के लिए भर्ती कर स्वास्थ्य पर निगरानी रखी गई। स्त्री रोग विशेषज्ञ द्वारा एलएससीएस कराने की सलाह दी गई। किन्तु स्टॉफ नर्स द्वारा रात्रि में नार्मल डिलेवरी कराई गई। अत्याधिक रक्त स्त्राव होने से आकास्मिकता की स्थिति निर्मित हुई। चिकित्सकों द्वारा रोकने का प्रयास किया गया। ब्लड भी चढाया गया। महिला को मेडिकल कॉलेज रेफर दौरान जबेरा के नजदीक रास्ते में मृत्यु हो गई।वहीं कलेक्टर श्री कोचर ने विकासखंड बटियागढ़ मगरोन की आरती लोधी के मातृमृत्यु समीक्षा में स्वास्थ्य दस्तावेज अवलोकन में पाया कि मैदानी सेवा प्रदाता एवं संस्था स्तर पर संबंधित महिला को समुचित स्वास्थ्य देखभाल-उपचार सेवा दी गई।

आरती लोधी को 32 सप्ताह की गर्भावस्था थी। गर्भ में जुड़वा शिशु थे। गर्भावधि में लीकेज एवं पैरों में सूजन की समस्या होने पर मैदानी स्वास्थ्य सेवाप्रदाता सीएचओ द्वारा जच्चा-बच्चा की जीवन रक्षा एवं सुरक्षित प्रसव के लिए सीधे जिला चिकित्सालय रेफर किया गया। संस्था में एचडीयू यूनिट में भर्ती कर महिला को समुचित उपचार-परामर्श सेवा देना पाया गया। स्वास्थ्य लाभ होने पर महिला बिना जानकारी दिये वापस अपने घर लौट आई। अगले दिन तकलीफ होने पर फातिमा नर्सिंग होम में स्वास्थ्य जांच कराया। जहां से उन्हे जिला चिकित्सालय रेफर किया गया। जहां महिला का पुनः स्वास्थ्य परीक्षण किया गया। गर्भ में जुड़वा शिशु होने पर ऑपरेशन के लिए ओ.टी. ले जाया गया। जहां पर महिला का ब्लड प्रेशर बढने पर वापस एचडीयू यूनिट लाने दौरान महिला द्वारा पानी पीने की इच्छा जताने पर परिजन द्वारा पानी पिलाया गया। तत्पश्चात स्वास्थ्य स्थिति में लगातार गिरावट हुई। चिकित्सकों द्वारा महिला की लगातार स्वास्थ्य देखभाल एवं उपचार किया जाता रहा। किन्तु महिला को नहीं बचाया जा सका।

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