कांग्रेस सांसद तन्खा ने लगाया था 10 करोड़ का मानहानि केस


नई दिल्ली। केन्द्रीय मंत्री शिवराज सिंह चौहान के खिलाफ कांग्रेस सांसद विवेक तन्खा द्वारा 10 करोड़ की मानहानि के मामले में आज सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई होगी। पिछले हफ्ते 19 मार्च को सुप्रीम कोर्ट में इस मामले की सुनवाई हुई थी। जिसमें विवेक तन्खा की तरफ से दर्ज कराए गए आपराधिक मानहानि मामले में कोर्ट ने शिवराज सिंह चौहान को अधीनस्थ न्यायालय के समक्ष व्यक्तिगत पेशी से छूट दी थी। वरिष्ठ अधिवक्ता विवेक तन्खा का आरोप है कि केंद्रीय मंत्री शिवराज सिंह चौहान, भारतीय जनता पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष वीडी शर्मा और पूर्व मंत्री भूपेंद्र सिंह ने राजनीतिक लाभ के लिए उनके खिलाफ समन्वित, दुर्भावनापूर्ण, झूठा और मानहानिकारक अभियान चलाया और मध्यप्रदेश में 2021 के पंचायत चुनाव में अन्य पिछड़ा वर्ग (ओबीसी) आरक्षण का विरोध करने का आरोप लगाया था।



आज होगी सुनवाई
बीते 19 मार्च को सुप्रीम कोर्ट के जस्टिस एमएम सुंदरेश और जस्टिस राजेश बिंदल की पीठ ने शिवराज और बीजेपी के दो अन्य नेताओं की याचिका पर सुनवाई आज 26 मार्च तक टाल दी थी। मध्यप्रदेश हाईकोर्ट के 25 अक्टूबर के उस आदेश के खिलाफ शिवराज सिंह चौहान की अपील पर सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई होनी है। जिसमें मानहानि मामले को रद्द करने से इनकार कर दिया गया था। इससे पहले सुप्रीम कोर्ट ने मानहानि मामले में तीनों भाजपा नेताओं के खिलाफ जमानती वारंट की तामील पर रोक लगा दी थी। अदालत ने शिवराज चौहान और अन्य भाजपा नेताओं की अपील पर तन्खा से जवाब मांगा था। तन्खा की तरफ से वरिष्ठ वकील कपिल सिब्बल और अधिवक्ता सुमीर सोढ़ी पैरवी कर सकते हैं।
जनवरी 2024 में दर्ज हुआ था मानहानि का मामला……
प्रदेश के तत्कालीन मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान के साथ भाजपा प्रदेश अध्यक्ष वीडी शर्मा और पूर्व मंत्री भूपेंद्र सिंह ने विवेक तन्खा को लेकर एक बयान दिया था। जिसमें उन्हें ओबीसी विरोधी बताया था। इस मामले में विवेक तन्खा ने तीनों नेताओं पर 10 करोड़ रुपए का मानहानि का दावा करते हुए जबलपुर जिला कोर्ट में केस दायर किया था। उन्होंने बताया था कि भाजपा नेताओं ने उन्हें ओबीसी विरोधी बताया, इससे उनकी छवि धूमिल हुई है।
हाईकोर्ट ने मानहानि केस रद्द करने से किया था इनकार
तन्खा की ओर से राज्य के पूर्व मुख्यमंत्री शिवराज, प्रदेश भाजपा अध्यक्ष वीडी शर्मा और पूर्व मंत्री भूपेंद्र सिंह के खिलाफ दायर मानहानि मामले को रद्द करने से 25 अक्टूबर को मध्यप्रदेश हाईकोर्ट ने इनकार कर दिया था। तन्खा ने अधीनस्थ अदालत में अपनी शिकायत में कहा था कि 2021 में मध्यप्रदेश में पंचायत चुनावों से पहले मानहानिकारक बयान दिए गए थे।
