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जबलपुर। शनिचरी अमावस्या पर कल मंदिरों में विशेष अभिषेक पूजन किये गये। तिलवाराघाट स्थित शनि धाम में, सदर स्थित शनि मंदिर में, अमावस्या के मोके पर सुबह पूजन हुआ और शाम को शनि देव का अभिषेक किया गया। इस अवसर पर भगवान शनिदेव को 56 भोग अर्पित किये गये। सुबह से शुरू हुआ भण्डारा देर रात तक चला। बहुत से श्रद्धालुओं ने शनिवार को सूर्य पुत्र भगवान शनि के साथ-साथ सूर्यदेव श्रीराम भक्त हनुमान का पूजन अर्चन कर पुण्य लाभ अर्जित किया। ग्वारीघाट श्री रामलला मंदिर में भी प्रातः 7 बजे शनिदेव का पूजन और तेलाभिषेक किया गया। रात्रि 11 बजे महाआरती हुई।
शनिवार के दिन पड़ने वाली अमावस्या को शनिचरी अमावस्या कहा जाता है। इस दिन भगवान शनिदेव का विशेष पूजन अर्चन करने से भगवान सभी कष्टों को हर लेते हैं। ज्योतिष शास्त्रियों के मुताबिक शनिचरी अमावस्या पर शनिदेव का पूजन करने के बाद तिल, तेल और कम्बल का दान करना शुभ माना जाता है। कल सुबह से ही भगवान शनि देव की आराधना में श्रद्धालु लीन रहे। सुबह से देर रात तक पूजा अर्चना का क्रम चला। श्री सीताराम जी उस्ताद अखाड़ा में पूजन अभिषेक के बाद भण्डारे का कार्यक्रम चलता रहा। इस अवसर पर पंडित सतीश महाराज, पंडित अनिल मिश्रा, विन्धेश भापकर, नितिन भाटिया, संजय तिवारी आदि मौजूद थे|

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