
जबलपुर। प्रदेश के बिजली उपभोक्ताओं को एक बार फिर महंगाई का झटका लगा है। प्रदेश की बिजली कंपनियों ने फ्यूल कॉस्ट एंड पावर परचेज एडजस्टमेंट सरचार्ज बढ़ा दिया है, जिससे अगस्त में मिलने वाले बिजली बिल पहले की तुलना में अधिक आएंगे। एक ओर बढ़े हुए बिल उपभोक्ताओं की जेब पर बोझ डालेंगे, वहीं दूसरी ओर शहर और ग्रामीण क्षेत्रों में जारी बिजली कटौती ने लोगों की परेशानी और बढ़ा दी है।
बिजली कंपनियों के आदेश के अनुसार जुलाई 2026 के लिए एफसीपीपीए सरचार्ज 1.11 प्रतिशत से बढ़ाकर 3.77 प्रतिशत कर दिया गया है। यानी उपभोक्ताओं को अब 2.66 प्रतिशत अतिरिक्त सरचार्ज देना होगा। इसका सीधा असर बिजली बिल के एनर्जी चार्ज पर पड़ेगा। अनुमान है कि 200 से 300 यूनिट बिजली खर्च करने वाले उपभोक्ताओं के बिल में ₹35 से ₹87 तक की अतिरिक्त राशि जुड़ सकती है। प्रदेश के दो करोड़ से अधिक उपभोक्ता इस बढ़ोतरी से प्रभावित होंगे।
बिजली कंपनियों का तर्क है कि ईंधन और बिजली खरीद की लागत बढ़ने के कारण सरचार्ज में वृद्धि की गई है। यह निर्णय विद्युत नियामक आयोग के टैरिफ नियमों के तहत लिया गया है।
उपभोक्ताओं का कहना है कि पहले से ही महंगाई की मार झेल रहे परिवारों के लिए बिजली का बढ़ता खर्च नई चिंता बन गया है। घरेलू बजट पर इसका सीधा असर पड़ेगा, खासकर मध्यमवर्गीय और निम्न आय वर्ग के परिवारों पर, जिनके लिए हर महीने बढ़ता बिजली बिल आर्थिक दबाव बढ़ा रहा है।
बिल ज्यादा, बिजली कम…….
प्रदेश में सामान्य से कम बारिश का असर बिजली व्यवस्था पर भी दिखाई देने लगा है। जलाशयों में जलस्तर घटने से कई ग्रामीण क्षेत्रों में रात के समय 6 से 8 घंटे तक बिजली कटौती की जा रही है। जबलपुर और आसपास के गांवों में भी लगातार ट्रिपिंग और बार-बार बिजली गुल होने की शिकायतें सामने आ रही हैं। ऐसे में उपभोक्ताओं का कहना है कि जब पर्याप्त बिजली नहीं मिल रही, तब बढ़े हुए बिल वसूलना लोगों के साथ अन्याय है।
एक साल में 37 प्रतिशत बढ़ी बिजली की मांग….
बिजली कंपनियों के आंकड़ों के अनुसार 27 जुलाई 2025 को प्रदेश में अधिकतम बिजली मांग 10,024 मेगावाट थी, जो 27 जुलाई 2026 को बढ़कर 13,757 मेगावाट पहुंच गई। यानी एक वर्ष में बिजली की मांग में करीब 37 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई है। बढ़ती मांग और उत्पादन पर दबाव के बीच अब उपभोक्ताओं को महंगी बिजली और कटौती—दोनों का सामना करना पड़ रहा है।
