2026 वरिष्ठता वाले कर्मचारियों के लिए फिर बैठेगी डीपीसी

भोपाल । मध्यप्रदेश में वर्षों बाद शुरू हुई पदोन्नति प्रक्रिया का पहला चरण पूरा होने के बाद अब सरकार दूसरे चरण की तैयारी में है। इस बार फोकस उन हजारों अधिकारी-कर्मचारियों पर रहेगा, जो वर्ष 2026 की वरिष्ठता सूची के कारण पिछले प्रमोशन अभियान में शामिल नहीं हो सके। सरकार सितंबर या अक्टूबर से विभागवार विभागीय पदोन्नति समिति (डीपीसी) की बैठकें फिर से बुलाने की तैयारी कर रही है, ताकि छूटे हुए पात्र कर्मचारियों को पदोन्नति का लाभ दिया जा सके। यह कदम इसलिए महत्वपूर्ण माना जा रहा है क्योंकि हाल ही में हुई डीपीसी में वर्ष 2025 की रिक्तियों और वरिष्ठता के आधार पर प्रमोशन दिए गए थे, जिससे बड़ी संख्या में ऐसे अधिकारी-कर्मचारी बाहर रह गए जिनकी बारी 2026 की वरिष्ठता के अनुसार बनती थी।
पदोन्नति प्रक्रिया पूरी होने के बाद कई विभागों के अधिकारी-कर्मचारियों ने राज्य शासन के समक्ष आपत्ति दर्ज कराई है। उनका कहना है कि पुरानी और अद्यतन नहीं की गई वरिष्ठता सूचियों तथा कुछ विभागीय स्तर की तकनीकी त्रुटियों के कारण वे पदोन्नति से वंचित रह गए। कई विभागों में रिक्त पद भर गए, लेकिन पात्र कर्मचारी प्रमोशन नहीं पा सके। इसी फीडबैक के बाद सरकार अब दूसरे चरण में छूटे हुए मामलों की समीक्षा कर नई डीपीसी कराने की तैयारी में है।
सूत्रों के अनुसार सितंबर-अक्टूबर से शुरू होने वाली डीपीसी में केवल छूटे हुए कर्मचारियों के मामलों की समीक्षा ही नहीं होगी, बल्कि वर्ष 2027 की संभावित रिक्तियों को भी शामिल कर नियमित पदोन्नति प्रक्रिया पूरी की जाएगी। सरकार का लक्ष्य नवंबर तक अधिकांश लंबित मामलों का निपटारा करना है, ताकि विभागों में पदोन्नति संबंधी लंबित स्थिति समाप्त हो सके।
कोर्ट के फैसले पर भी रहेगी नजर
हालांकि सरकार की पूरी योजना पदोन्नति में आरक्षण से जुड़े न्यायालयीन विवाद से भी प्रभावित हो सकती है। यह मामला अभी उच्च न्यायालय में विचाराधीन है। सरकार द्वारा अब तक जारी सभी पदोन्नति आदेश अदालत के अंतिम निर्णय के अधीन हैं। यदि इस दौरान न्यायालय कोई नया आदेश देता है, तो आगे की डीपीसी और पदोन्नति प्रक्रिया उसी के अनुरूप संचालित की जाएगी।
क्यों छूट गए 2026 वरिष्ठता वाले कर्मचारी?
हालिया पदोन्नति अभियान में विभागों ने वर्ष 2025 की वरिष्ठता सूची और 31 दिसंबर 2025 तक की रिक्तियों को आधार बनाया। परिणामस्वरूप जिन कर्मचारियों की वरिष्ठता 2026 में प्रभावी होनी थी, वे प्रमोशन की पात्रता के बावजूद प्रक्रिया से बाहर रह गए। अब सरकार इन्हीं कर्मचारियों को अवसर देने के लिए दूसरा चरण शुरू करने जा रही है।
2025 के नियमों के तहत शुरू हुई थी प्रक्रिया
राज्य सरकार ने मध्यप्रदेश लोक सेवा पदोन्नति नियम-2025 लागू करने के बाद 30 जून को सभी विभागों को निर्देश दिए थे कि लंबित रिक्तियों और वर्ष 2025 तक की संभावित रिक्तियों के लिए डीपीसी आयोजित कर पदोन्नति दी जाए। इसी आदेश के आधार पर जुलाई में बड़े स्तर पर प्रमोशन किए गए। हालांकि नियमों में आवश्यक संशोधन न होने और वरिष्ठता सूची अद्यतन नहीं होने के कारण कई मामलों में विवाद भी सामने आए।
अब सरकार के सामने दोहरी चुनौती
सरकार के सामने अब दो प्रमुख चुनौतियां हैं। पहली, पदोन्नति से वंचित पात्र कर्मचारियों को न्यायसंगत अवसर देना और दूसरी, पूरी प्रक्रिया को न्यायालय के संभावित फैसले के अनुरूप बनाए रखना। यदि सितंबर-अक्टूबर में प्रस्तावित डीपीसी समय पर हो जाती है, तो हजारों अधिकारी-कर्मचारियों की लंबे समय से लंबित पदोन्नति का रास्ता साफ हो सकता है। वहीं, अदालत के निर्णय के बाद सरकार को आवश्यक होने पर पूरी प्रक्रिया में संशोधन भी करना पड़ सकता है।
