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गांव-गांव जनसंपर्क कर स्थानीय समस्याओं और जनभावनाओं को चुनावी अभियान का केंद्र बनाया

दतिया। विधानसभा उपचुनाव के लिए भाजपा और कांग्रेस दोनों ने इस चुनाव में पूरी ताकत झोंक दी थी। अब नजर इस बात पर है कि किसकी रणनीति ज्यादा प्रभावी रहेगी और कौन से मुद्दे मतदाताओं को सबसे अधिक प्रभावित करेंगे। दतिया उपचुनाव को भाजपा और कांग्रेस दोनों ने प्रतिष्ठा का चुनाव बना दिया। भाजपा की ओर से मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव, केंद्रीय मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया समेत कई वरिष्ठ नेताओं ने चुनाव प्रचार किया। वहीं कांग्रेस की तरफ से प्रदेश अध्यक्ष जीतू पटवारी, नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार सहित कई दिग्गज नेताओं ने मोर्चा संभाला। अब सबकी नजर इस बात पर है कि उपचुनाव में भाजपा की रणनीति या कांग्रेस का स्थानीय दांव काम आएगा।

भाजपा ने अपने प्रचार अभियान में डबल इंजन सरकार, विकास कार्य, सडक़, बिजली, पानी, महिला सशक्तिकरण और राज्य सरकार की जनकल्याणकारी योजनाओं को प्रमुख मुद्दा बनाया। पार्टी ने विकास की निरंतरता के नाम पर मतदाताओं से समर्थन मांगा। दूसरी ओर कांग्रेस ने महंगाई, बेरोजगारी, किसानों की समस्याएं, कानून-व्यवस्था, स्थानीय विकास और प्रशासन के कथित दुरुपयोग जैसे मुद्दों पर सरकार को घेरा। कांग्रेस ने इस चुनाव को जनता बनाम सरकार की लड़ाई के रूप में पेश करने की कोशिश की।
इस चुनाव में पूर्व गृह मंत्री डॉ. नरोत्तम मिश्रा की भूमिका सबसे अधिक चर्चा में रही। दतिया उनकी राजनीतिक कर्मभूमि रही है। उन्होंने संगठन के साथ मिलकर बूथ स्तर तक चुनावी रणनीति तैयार की और कार्यकर्ताओं को सक्रिय बनाए रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। वहीं कांग्रेस प्रत्याशी ने स्थानीय चेहरा होने का लाभ उठाने की कोशिश की। उन्होंने गांव-गांव जनसंपर्क कर स्थानीय समस्याओं और जनभावनाओं को चुनावी अभियान का केंद्र बनाया। कांग्रेस संगठन ने भी उनके समर्थन में लगातार प्रचार अभियान चलाया। इसी बीच बीजेपी ने ब्राह्मण चेहरे के रूप में युवा नेता आशुतोष तिवारी को मैदान में उतारा है। कुछ का मानना है कि एक वर्ग में खामोश नाराजगी जरूर है, जिसका असर मतदान के दौरान देखने को मिल सकता है।
जातीय समीकरण
दतिया का चुनावी गणित हमेशा से दिलचस्प रहा है। यहां कोई भी एक समाज अकेले जीत-हार तय करने की स्थिति में नहीं है, लेकिन कुछ वर्ग चुनाव परिणाम पर निर्णायक प्रभाव रखते हैं। उपलब्ध चुनावी आकलनों के अनुसार ब्राह्मण समाज की हिस्सेदारी करीब 14.8 प्रतिशत, अहिरवार-जाटव समाज की 14.7 प्रतिशत, कुशवाहा-काछी समाज की 12.2 प्रतिशत, यादव समाज की 7.4 प्रतिशत और लोधी समाज की लगभग 6.9 प्रतिशत मानी जाती है। ऐसे में एक-दो प्रतिशत वोटों का इधर-उधर होना भी मुकाबले का परिणाम बदल सकता है। डॉ. नरोत्तम मिश्रा लंबे समय तक दतिया की राजनीति का प्रमुख चेहरा रहे हैं।
इस बार मुकाबला भी पूरी तरह एकतरफा नहीं माना जा रहा। बीजेपी के आशुतोष तिवारी के सामने कांग्रेस के उम्मीदवार के साथ आजाद समाज पार्टी से दामोदर यादव भी चुनाव मैदान में हैं। वहीं अहिरवार-जाटव और कुशवाहा-काछी समाज के मतदाताओं को भी इस चुनाव में अहम माना जा रहा है। इन वर्गों का रुख किस दल की ओर जाता है, यह परिणाम तय करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है।

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