कोर्ट ने कहा कि सभी गंभीर अपराध की जांचों की निगरानी वे करेंगे

इन्दौर। मध्यप्रदेश उच्च न्यायालय की इन्दौर खंडपीठ में जस्टिस सुबोध अभ्यंकर ने चार वर्ष पुराने डकैती और हत्या के मामले में आरोपी की जमानत याचिका पर सुनवाई करते हुए डीजीपी को गंभीर अपराधों की जांच के लिए हर जिले में आईपीएस लेवल के वरिष्ठ अधिकारी के नेतृत्व में एसआईटी बनाने के निर्देश दिए हैं। कोर्ट ने कहा कि सभी गंभीर अपराध की जांचों की निगरानी वे करेंगे। जस्टिस अभ्यंकर ने आरोपी की और से दायर छठी जमानत याचिका को कार्यवाही में देरी और ठोस सबूतों की कमी के कारण मंजूर करते कहा कि कई प्रकरणों में केवल जांच अधिकारी और फोरेंसिक विशेषज्ञों की ओर से विफलता के कारण, आरोपी को संदेह का लाभ दिया गया और उसे एक जघन्य अपराध के लिए बरी कर दिया गया। वर्तमान मामले में भी, जैसा कि पहले ही बताया गया है, जांच अधिकारी ने उस घर से फिंगरप्रिंट लेने का कोई प्रयास नहीं किया, जहां हत्या हुई थी। इस अदालत द्वारा बार-बार यह इंगित करने के बावजूद कि जांच अधिकारियों द्वारा गंभीर चूक की जाती है, जांच के तरीकों और दृष्टिकोण में कोई स्पष्ट प्रगति नहीं की गई तथा आरोपी व्यक्तियों को बेखौफ जाने दिया जाता है। ऐसा प्रतीत होता है कि इस संबंध में इस अदालत या अन्य अदालतों की ओर से की गई जो भी टिप्पणियां हैं, वे केवल उनकी अपनी अंतरात्मा की संतुष्टि के लिए हैं। यह समझना होगा कि जब कोई आपराधिक मुकदमा शुरू से ही केवल लापरवाह जांच के कारण विफल हो जाता है, तो यह सरासर एक गलती है।
जस्टिस अभ्यंकर ने हत्या और डकैती के मामले में पुलिस जांच के संचालन की तीखी आलोचना करते हुए आरोपी सुनीत उर्फ सुमित सिंह की छठवीं बार दायर जमानत याचिका स्वीकार करते उसे जमानत दे दी है। बता दें कि मामले में आवेदक ने नई लागू भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (बीएनएसएस) 2023 और सीआरपीसी की धारा 439 के तहत छठी बार जमानत याचिका दायर की थी, जिसे कोर्ट ने कार्यवाही में देरी और ठोस सबूतों की कमी के कारण मंजूर करने के साथ उक्त टिप्पणी करते डीजीपी को हर जिले में एसआईटी बनाने के निर्देश दिए।
