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मूल दस्तावेज मौजूद ही नहीं ऐसी स्थिति में छानबीन समिति ने फर्जी जाति सर्टिफिकेट मामले में क्लीनचिट कैसे दे दी?
इन्दौर। नगर निगम वार्ड क्र. 65 के भाजपा पार्षद कमलेश कालरा के फर्जी जाति प्रमाणपत्र मामले में मूल दस्तावेज मौजूद ही नहीं होने की स्थिति में उच्चस्तरीय छानबीन समिति ने कालरा के फर्जी जाति सर्टिफिकेट मामले में क्लीनचिट कैसे दे दी? इस सवाल को लेकर तथ्यों के साथ कालरा के खिलाफ चुनाव लड़ें कांग्रेस प्रत्याशी सुनील यादव ने हाईकोर्ट में छानबीन समिति द्वारा कालरा के जाति प्रमाण पत्र मामले में क्लीनचिट दिए जाने के खिलाफ याचिका दायर की है। एड्वोकेट मनीष यादव के मार्फत सुनील यादव द्वारा हाईकोर्ट में दायर की गई याचिका में छानबीन समिति की जांच कार्रवाई के साथ ही पटवारी की रिपोर्ट और अन्य संबंधित पक्षों के बयानों के संदर्भ और तथ्यों का हवाला देते छानबीन समिति की कार्रवाई को चुनौती दी गई है। याचिका में उन्होंने कहा है कि उच्चस्तरीय छानबीन समिति ने कालरा के 2006 में बने लोहार जाति सर्टिफिकेट की पूरी तरह जांच न करते हुए कलेक्टर कार्यालय से बने 2009 के जाति सर्टिफिकेट को सही मानकर कालरा के पक्ष में फैसला दे दिया है। जबकि कालरा ने समिति के समक्ष कहा था कि उनके लोहार जाति के मूल दस्तावेज 2006 में राजदेव अपार्टमेंट खातीवाला टैंक स्थित ऑफिस में लगी आग में जल गए थे। सवाल ये है कि जब सारे दस्तावेज जल गए तो कलेक्टोरेट में 2009 में कालरा का लोहार जाति सर्टिफिकेट कैसे बन गया? दूसरी बात यह है कि कलेक्टोरेट से कहा गया कि कालरा का जाति सर्टिफिकेट तो बनाया पर उसके दस्तावेज कार्यालय में मौजूद नहीं है। सवाल ये है कि कागजात कहां चले गए? ये भी तथ्य है कि जब कालरा के चाचा वासुदेव कालरा ने पुलिस को दिए बयान में कहा था कि 50 साल पहले वे पाकिस्तान के जैकमाबाद से इंदौर आए थे और हम पिछड़ी नहीं बल्कि सामान्य जाति से हैं, तो फिर छानबीन समिति ने उनके बयान पर गौर क्यों नहीं किया ?
यादव ने कहा कि जिस पटवारी ने जाति सर्टिफिकेट मामले की जांच की थी, उसने अपनी रिपोर्ट भी बस औपचारिक बना दी । रिपोर्ट में उसने कहा कि कालरा के पड़ौसियों के बयान तो लिए, लेकिन उनके नाम तथा मोबाइल नंबर नहीं लिए, क्यों? हस्ताक्षर भी आड़े तिरछे करवाए। आश्चर्य की बात ये है कि अधिकारियों ने भी पटवारी की आधी-अधूरी और त्रुटिपूर्ण रिपोर्ट को सही मान लिया। उन्होंने बताया कि एक और तथ्य ये है कि कालरा के स्कूल प्रिंस एकेडमी की प्रिंसिपल सुनीता जेठवानी का कहना है कि 30 साल पहले स्कूल में बारिश का पानी घुस गया था, जिसमें कागजात नष्ट हो गए। उन्होंने यह भी बताया कि अब स्कूल बंद कर दिया गया है और सारा रिकॉर्ड संकुल में जमा करवा दिया है। यदि रिकार्ड नष्ट हो गया तो जमा क्या करवाया? उनकी कहीं कोई शिकायत दर्ज नहीं करवाना भी संदेह पैदा कर रहा है। अब कालरा को जाति प्रमाण पत्र मामले में छानबीन समिति की क्लीनचिट पर हाइकोर्ट की कार्रवाई का इंतजार है।

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