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सुरक्षित मातृत्व की ओर एक कदम

छिंदवाड़ा / सांझी पहल फाउंडेशन द्वारा ग्राम लोनिया में मातृ एवं शिशु स्वास्थ्य को समर्पित एक विशेष ‘गोद भराई सह जागरूकता कार्यक्रम’ का आयोजन किया गया। इस अनूठी पहल का उद्देश्य न केवल गर्भवती महिलाओं का पारंपरिक रीति-रिवाजों से सम्मान करना था, बल्कि उन्हें आधुनिक स्वास्थ्य मानकों और पोषण के प्रति शिक्षित करना भी था।
परंपरा और विज्ञान का अनूठा संगम
कार्यक्रम की शुरुआत स्थानीय गर्भवती महिलाओं के पारंपरिक अभिनंदन (गोद भराई) के साथ हुई। संस्था के स्वयंसेवकों सोनम सहारे और तनुश्री कोचे ने महिलाओं को तिलक लगाकर, फल देकर और मंगल गीतों के बीच उनके सुरक्षित भविष्य की कामना की। इसके पश्चात स्वास्थ्य सत्र की शुरुआत हुई, जिसमें विशेषज्ञों ने ‘स्वस्थ माँ, स्वस्थ बच्चा’ के मूल मंत्र पर विस्तार से प्रकाश डाला।
स्वास्थ्य चर्चा के मुख्य बिंदु (विस्तृत विवरण):
पोषण और संतुलित आहार: गर्भवती महिलाओं को बताया गया कि उनके भोजन में केवल पेट भरना पर्याप्त नहीं है, बल्कि उसमें प्रोटीन, कैल्शियम, आयरन और फोलिक एसिड की भरपूर मात्रा होनी चाहिए। स्थानीय स्तर पर उपलब्ध मौसमी फल, हरी सब्जियाँ और दालों के महत्व को समझाया गया।
नियमित स्वास्थ्य जांच (ANC): प्रसव से पहले कम से कम चार अनिवार्य स्वास्थ्य जांचों के महत्व पर जोर दिया गया ताकि उच्च जोखिम वाली गर्भावस्था की पहचान समय रहते की जा सके।
टीकाकरण और दवाएं: टिटनेस के टीके और आयरन की गोलियों के नियमित सेवन के प्रति जागरूक किया गया।
स्वच्छता और प्रसव पूर्व तैयारी: प्रसव के समय और उसके बाद संक्रमण से बचने के लिए व्यक्तिगत स्वच्छता और संस्थागत प्रसव (अस्पताल में जन्म) के लाभ गिनाए गए।
शिशु पोषण और धात्री महिलाओं का मार्गदर्शन
कार्यक्रम में मौजूद 10–12 धात्री महिलाओं को विशेष रूप से संबोधित करते हुए बताया गया कि जन्म के तुरंत बाद शिशु को दिया जाने वाला ‘गाढ़ा पीला दूध’ (कोलोस्ट्रम) बच्चे की पहली वैक्सीन का काम करता है। साथ ही, ‘एक्सक्लूसिव ब्रेस्टफीडिंग’ यानी शुरुआती छह महीनों तक केवल माँ का दूध देने की सलाह दी गई, जिससे शिशु की रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ती है।
समुदाय की सहभागिता (आंकड़े)
कार्यक्रम में गाँव के विभिन्न वर्गों ने अपनी उपस्थिति दर्ज कराई, जो सामुदायिक एकता का प्रतीक रही:
गर्भवती महिलाएं: 03 (जिन्हें विशेष किट और सम्मान दिया गया) धात्री महिलाएं: 10–12
बच्चे एवं बालिकाएं: 23 (जिन्हें स्वच्छता के प्रति जागरूक किया गया)!
पुरुष: 04 (पितृत्व जिम्मेदारी और सहयोग पर चर्चा)
फ्रंटलाइन वर्कर्स: आंगनबाड़ी कार्यकर्ता, सहायिका और आशा वर्कर्स ने भी रिकॉर्ड प्रबंधन और स्थानीय समन्वय में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।
गतिविधियाँ एवं समापन
जागरूकता सत्र को रोचक बनाने के लिए प्रश्नोत्तरी (Quiz) और चर्चा आयोजित की गई, जहाँ महिलाओं ने बेझिझक अपने स्वास्थ्य संबंधी सवाल पूछे। कार्यक्रम के अंत में उपस्थित सभी प्रतिभागियों को पौष्टिक अल्पाहार वितरित किया गया।
संस्था का संदेश: सांझी पहल फाउंडेशन के प्रतिनिधियों ने अपने संबोधन में कहा, “हमारा लक्ष्य केवल एक दिन का उत्सव मनाना नहीं है, बल्कि हर घर तक स्वास्थ्य की जानकारी पहुँचाना है। जब एक माँ जागरूक होती है, तो पूरा परिवार सुरक्षित रहता है। ग्रामीण क्षेत्रों में मातृ-शिशु मृत्यु दर को शून्य पर लाना ही हमारा अंतिम संकल्प है।”

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