
भोपाल। कांग्रेस के तराना विधानसभा क्षेत्र के विधायक महेश परमार ने मध्य प्रदेश आबकारी विभाग में व्याप्त गंभीर अनियमितताओं और भ्रष्टाचार के मामलों की केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) से जांच कराने की मांग की है। उन्होंने इस संबंध में सीबीआई निदेशक को विस्तृत शिकायत पत्र लिखकर मामला दर्ज कराया है।
परमार ने आरोप लगाया कि आबकारी विभाग के अधिकारियों तथा तत्कालीन आबकारी आयुक्त अभिजीत अग्रवाल ने पद का दुरुपयोग करते हुए सोम डिस्टिलरी को अनुचित आर्थिक लाभ पहुंचाया। उन्होंने बताया कि इंदौर के देपालपुर न्यायालय ने 23 दिसंबर 2023 को संबंधित मामले में दोष सिद्ध करते हुए सजा सुनाई थी, लेकिन विभाग द्वारा जानबूझकर दो वर्ष तक कोई नियमानुसार कार्रवाई नहीं की गई और प्रकरण को लंबित रखा गया।
उच्च न्यायालय द्वारा हाल ही में सोम डिस्टिलरी की याचिका खारिज करते हुए तत्कालीन आबकारी आयुक्त की भूमिका पर गंभीर प्रश्न उठाए गए हैं, जिससे परमार द्वारा की गई शिकायत को मजबूती मिली है। मध्य प्रदेश कांग्रेस इस उच्च न्यायालय के आदेश का स्वागत करती है।
विधायक महेश परमार ने मुख्यमंत्री से अनुरोध किया है कि तत्कालीन आबकारी आयुक्त अभिजीत अग्रवाल एवं तत्कालीन सहायक आबकारी आयुक्त संजीव दुबे को तुरंत निलंबित किया जाए तथा सीबीआई से जांच कराई जाए कि:
देपालपुर न्यायालय के निर्णय को दो वर्ष तक जानबूझकर क्यों रोके रखा गया?
इस दौरान सोम डिस्टिलरी समूह को दो वर्ष तक अनुचित आर्थिक लाभ क्यों पहुंचाया गया?
क्या मामले को लंबित रखने के लिए उन पर किसी बड़े राजनेता या वरिष्ठ सरकारी अधिकारी का दबाव था?
परमार ने यह भी आरोप लगाया कि जहां लाइसेंस निरस्तीकरण की सख्त कार्रवाई होनी चाहिए थी, वहां केवल निलंबन जैसे हल्के कदम उठाए गए। साथ ही, कानूनी प्रावधानों का जानबूझकर गलत उपयोग कर पूरे मामले को कमजोर करने का प्रयास किया गया, जिससे न्यायिक प्रक्रिया प्रभावित हुई। उन्होंने कहा कि इस पूरे प्रकरण में आबकारी आयुक्त सहित कई वरिष्ठ अधिकारियों की भूमिका संदिग्ध है और इनके माध्यम से करोड़ों रुपये का आर्थिक लाभ पहुंचाया गया है। श्री परमार ने मांग की है कि भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के अंतर्गत तत्काल मामला दर्ज कर निष्पक्ष एवं उच्चस्तरीय जांच कराई जाए तथा दोषियों के खिलाफ सख्त से सख्त कार्रवाई सुनिश्चित की जाए।
महेश परमार ने जोर देकर कहा कि मध्य प्रदेश में कानून का राज स्थापित करने और भ्रष्टाचार पर अंकुश लगाने के लिए इस मामले की सीबीआई जांच अत्यंत आवश्यक है।
