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पूर्व राज्यपाल अनुसुइया उइके की शिकायत पर छत्तीसगढ़ पुलिस छिंदवाड़ा पहुंची

छिंदवाड़ा। कुंभ मेले में महामंडलेश्वर की उपाधि पा चुके अजय रामदास को सोमवार दोपहर छत्तीसगढ़ पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया। कोतवाली पुलिस ने गिरफ्तारी में पूरा सहयोग किया। मामला वर्ष 2019 का है, जब छत्तीसगढ़ की तत्कालीन राष्ट्रीय अनुसूचित जनजाति आयोग की उपाध्यक्ष और वर्तमान में पूर्व राज्यपाल सुश्री अनुसुइया उइके के लेटर पैड का दुरुपयोग कर कुछ लोगों को फर्जी पत्र जारी किए गए थे। पत्रों की भाषा और शैली पर सवाल उठे तो शिकायत खुद सुश्री उइके के पास पहुंची। इसके बाद उन्होंने छत्तीसगढ़ और मध्यप्रदेश पुलिस में इसकी शिकायत दर्ज कराई थी। मामले में लगातार जांच जारी थी और आखिरकार पुलिस ने अजय रामदास उर्फ अजय वर्मा को गिरफ्तार कर लिया। जानकारी के मुताबिक, अजय रामदास ने पिछले साल चौरई विधानसभा क्षेत्र में भव्य धार्मिक आयोजन भी किया था, जिसमें जगतगुरु रामभद्राचार्य ने कथा वाचन किया था। अजय ने विधानसभा चुनाव से पहले राजनीति में भी किस्मत आजमाने की कोशिश की थी। रामभद्राचार्य ने उनके लिए पार्टी से टिकट की सिफारिश भी की थी, हालांकि टिकट उन्हें नहीं मिल पाया। इसके बावजूद वह क्षेत्रीय राजनीति में एक चर्चित चेहरा बन गए थे। सोमवार को रायपुर से छत्तीसगढ़ पुलिस की टीम छिंदवाड़ा पहुंची और कोतवाली थाना क्षेत्र के लालबाग से अजय रामदास वर्मा को हिरासत में लेकर रायपुर रवाना हो गई।

पत्रों की भाषा मेरे चरित्र और गरिमा को आहत करने वाली थी

इस प्रकरण पर पूर्व राज्यपाल अनुसुइया उइके ने कहा, “29 जुलाई को राज्यपाल पद संभालने के बाद जानकारी मिली थी कि मेरे लेटर पैड और हस्ताक्षर का दुरुपयोग कर कुछ पत्र छत्तीसगढ़ के विधायकों और अन्य प्रमुख लोगों को भेजे गए हैं। पत्रों की भाषा मेरे चरित्र और गरिमा को आहत करने वाली थी। इसकी शिकायत मैंने पुलिस से की थी। पत्रों की कॉपी भी मुझे उपलब्ध कराई गई थी। इस गंभीर विषय पर मैंने छत्तीसगढ़ और मध्यप्रदेश पुलिस को शिकायत भेजी थी। जांच में जो तथ्य सामने आए, उनके आधार पर कार्रवाई हुई है। कोतवाली थाना प्रभारी उमेश गोल्हानी ने बताया कि रायपुर सिविल लाइन पुलिस ने अजय रामदास वर्मा को गिरफ्तार किया है। 2019 के इस प्रकरण में वह संलिप्त पाए गए। वर्मा के खिलाफ पहले से भी कोतवाली थाने में धोखाधड़ी (धारा 420) के तहत मामले दर्ज हैं। अजय वर्मा ने खुद को महामंडलेश्वर बताते हुए कई धार्मिक आयोजनों में सक्रियता दिखाई थी। पुलिस जांच में उनकी संलिप्तता साबित होने के बाद गिरफ्तारी की गई है।

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