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आवासीय कालोनी विकसित करने के अनुबंध से जुड़ा बहुचर्चित प्रकरण
जबलपुर। अपर सत्र न्यायाधीश महिमा कछवाहा की अदालत ने एक करोड़ 72 लाख की धोखाधड़ी के आरोपित बजरंग नगर, करमेता, माढ़ोताल निवासी संदीप ठाकुर की जमानत अर्जी निरस्त कर दी। मामला आवासीय कालोनी विकसति करने के अनुबंध से संबंधित है। कोर्ट ने पूरे मामले का अवलोकन करने के बाद अपने आदेश में साफ किया कि प्रथमदृष्ट्य आरोपित के निर्दोष होने की संभावना प्रकट नहीं हो रही है। छल व आपाधिक न्याय भंग गंभीर प्रकृति का आरोप है, इसलिए जमानत नहीं दी जा सकती।

मामले की सुनवाई के दौरान राज्य की ओर से अतिरिक्त लोक अभियोजक सरोज तिवारी व आपत्तिकर्ता मेसर्स गजानंद डवलपर्स पार्टनर पंकज सराफ, प्रकाश अग्रवाल की ओर से अधिवक्ता रवींद्रनाथ चतुर्वेदी ने जमानत आवेदन का विरोध किया। उन्होंने दलील दी कि आरोपित आवेदक के विरुद्ध माढ़ोताल पुलिस ने धोखाधड़ी सहित अन्य धाराओं के अंतर्गत प्रकरण पंजीबद्ध किया है। उस पर आरोप है कि उसने रिमझा स्थिति आपत्तिकर्ताओं की कृषि भूमि में आवासीय कालोनी विकसित करने का अनुबंध किया था। दो माह में विकास कार्य पूर्ण करने का वादा किया था। आपसी सहमति से यह अवधि तीन माह तक बढ़ाई जा सकेगी। इसके साथ ही 850 रुपये वर्गफीट के हिसाब से भूखंडों का विक्रय आवेदक विकासकर्ता की हैसियत से करेगा। प्राप्त होने वाली राशि भूमि स्वामी आपत्तिकर्ताओं को देगा। लेकिन आवेदक ने ऐसा नहीं किया। कई बार भुगतान के लिए कहने पर भी राशि हड़पे रहा। यहां तक कि आपत्तिकर्ताओं को परिवार सहित जान से मारने की धमकी पर उतारू हो गया। इस वजह से आपत्तिकर्ता व उनके परिवार असुरक्षित अनुभव कर रहे हैं। यदि जमानत का लाभ मिला तो आवेदक साक्ष्यों को प्रभावित कर सकता है। अदालत ने तर्क से सहमत होकर जमानत देने से इनकार कर दिया।

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