Spread the love

न्याय की देवी के नाम से प्रसिद्ध था बरारीपुरा का यह माता मंदिर
छिंदवाड़ा । बरारीपुरा स्थित मां बगलामुखी मंदिर इस समय अपनी और प्रसिद्धि की ओर बढ़ रहा है। ऐसा माना जाता है कि कलयुग में कल्याण करने वाले देवताओं में एक नाम मां बगलामुखी का भी है। ऐसा कहा जाता है कि इनकी आराधना करने वालों को इस युग में कभी कष्ट नहीं होगा और मां की कृपा उन पर बनी रहेगी। मौजूदा समय में इस मंदिर के प्रति श्रद्धालुओं की अगाध श्रद्धा देखी जा रही है लेकिन एक समय था जब इस मंदिर के पास आसपास के 14 गांवों के आपसी विवादों का निबटारा भी होता था। उस समय ये स्थान माता माय मंदिर के नाम से जाना जाता था। बताया जाता है इस देवस्थान के आसपास तब के स्थानीय शासकों ने धान, गेहंू, मक्का, ज्चार, सब्जियां उगाने के लिए बरार क्षेत्र के खेतिहर समाज के लोगों को यहां बसाया उन्हें रहने के लिए जगह दी। उन्हें इस क्षेत्र में चौदह जगहों पर बसाया गया। तभी से इस क्षेत्र का नाम बरारीपुरा पड़ गया जो अब तक चल रहा है। कहा जाता है उस समय यह जंगली इलाका था। यहंा एक इमली के पेड़ के नीचे देवस्थान पहले से ही था और यहंा वहीं आसपास रहने वाले पूजा करते थे। इसी देवस्थान पर कभी यहां उस समय बसे 14 गांवों में होने वाले आपसी विवादों केा निपटाने के लिए पंचायत लगती थी और न्याय किया जाता था। उस समय से यह न्याय की देवी के नाम से भी जानी जाती थी। कालांतर में इस स्थान के आसपास बसाहट बढ़ी तो पूजा करने वालों की संख्या भी। नवरात्र में भी यहां विशेष पूजन होता था। यहां रहने वाले लोग अपने पूर्वजों के कहे अनुसार बताते हैं कि बाद में यहंा अखाड़ा बना। उसके बाद सार्वजनिक और सामाजिक आयोजन भी होते रहे। इस बीच मां की कृपा से इस क्षेत्र की प्रसिद्धि भी बढ़ती गई। स्वतंत्रता संग्राम आंदोलन के दौरान ही मंदिर के जीर्णोद्धार के लिए समाज के प्रबुद्ध लोगों ने पहल की और एक समिति बनाई। इसका अध्यक्ष नाराण राव थोरात को बनाया गया। धर्माजी अलोने कोषाध्यक्ष बने और मंदिर के निर्माण की जिम्मेदारी स्वतंत्रता संग्राम सेनानी कृष्णा स्वामी नायडू केा सौंपी गई। कई अन्य सामाजिक कार्यकर्ता भी इससे जुड़े और बाद में इमली के पेड़ को कटवाकर यहां मंदिर बनाया गया। पोला पर्व पर पहले बैल जोड़ियों को यहां लाकर मंदिर की परिक्रमा कराई जाती थी। यह परंपरा आज भी जारी है और शहर में मनाया जाने वाला पोलापर्व की शोभायात्रा इसी क्षेत्र से निकाली जाती है। बरारीपुरा स्थित इस मंदिर में मां बगलामुखी की प्रतिमा स्वयूभू बताई जाती है और पांच दशक पहले से इस स्थान पर वे विराजमान हैं।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *