आरोपितों के खिलाफ एफआईआर निरस्त करने हाईकोर्ट का आदेश

जबलपुर। भोपाल स्थित ज्ञान गंगा स्कूल के संचालक व टीआई को नाबालिग से दुष्कर्म सहित अन्य धाराओं के अंतर्गत दर्ज प्रकरण में हाई कोर्ट ने राहत मिल गई है। हाई कोर्ट के न्यायमूर्ति संजय द्विवेदी की एकलपीठ ने सुनवाई के बाद उनके विरुद्ध दर्ज एफआईआर को निरस्त करने का आदेश पारित किया। एकलपीठ ने डीएनए प्रोफाइल रिपोर्ट का अवलोकन करने के बाद पाया कि जांच के लिए भेजे गए सैंपल बच्ची नहीं बल्कि महिला के थे। दरअसल, भोपाल स्थित ज्ञान गंगा स्कूल के संचालक मिनी राज मोदी व टीआई प्रकाश सिंह राजपूत के विरुद्ध एक महिला की शिकायत पर मिसरोद थाने में नाबालिग से दुष्कर्म सहित अन्य धाराओं के तहत प्रकरण दर्ज किया गया था। एफआईआर के अनुसार आठ वर्षीय पीड़ित बच्ची ज्ञान गंगा स्कूल के हास्टल में रहकर पढती थी। स्कूल प्रबंधन बच्चों को सिर्फ रविवार के दिन अभिभावकों से मिलने की अनुमति प्रदान करते हुए। महिला ने अपनी बच्ची से बात करने 28 अप्रैल, 2024 को दिन में फोन लगाया था। स्कूल प्रबंधन के द्वारा बताया गया कि बच्ची सो रही है। शाम को फोन लगाने पर बात करने के दौरान बच्ची रो रही थी। वीडियो काल करने पर बच्ची ने कुछ बताना चाहती थी तभी स्कूल वार्डन ने फोन काट दिया था। दूसरे दिन इंदौर जाते समय महिला स्कूल गई और बच्ची को घुमाने के लिए बाहर ले गई थी। इस दौरान बच्ची ने मां को बताया कि चार-पांच दिन पहले स्कूल वार्डन ने जबरदस्ती दाल-चावल खिलाया था। जिसके बाद वह सो गई थी और जागी तो देखा तो आपत्तिजनक स्थिति थी। याचिकाकर्ता से प्राप्त नमूने को डीएनए प्रोफाइलिंग के लिए भेजा था। डीएनए रिपोर्ट में ए सी और ई (जिसमें एफएसएल रिपोर्ट में वीर्य और मानव डीएनए पाया गया) के रूप में चिह्नित नमूने में पुरुष (वाई) डीएनए प्रोफाइल की उपस्थिति नहीं पाई गई। डीएनए रिपोर्ट में उपरोक्त नमूनों में महिला डीएनए प्रोफाइल है। इसके अलावा पुलिस ने जांच के लिए स्कूल में लगे सीसीटीवी कैमरे की फुटेज जब्त की थी। जिसमें आवेदक मिनी राव मोदी दिखाई नहीं दिए। पुलिस द्वारा जांच में 42 व्यक्तियों के बयान दर्ज किए। उन्होंने घटना को नकारा था। याचिकाकर्ता की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता मनीष दत्त व अधिवक्ता ईशान दत्त ने एकलपीठ को बताया कि महिला ने आवेदकों से धन ऐंठने के उद्देश्य से एफआईआर दर्ज कराई है। कथित महिला ने पूर्व में भी एक व्यक्ति के विरुद्ध वर्ष 2014 में दुष्कर्म की रिपोर्ट दर्ज कराई थी। इसके बाद वह अपने आरोपों से मुकर गई थी। न्यायालय ने आदेश पर उसके विरुद्ध 182 व 211 के तहत प्रकरण दर्ज करने के आदेश जारी किए गए थे। इसके अलावा उसके विरुद्ध अन्य आपराधिक प्रकरण दर्ज हैं। एकलपीठ ने डीएनए रिपोर्ट के आधार पर एफआईआर निरस्त करने का आदेश पारित कर दिया।
