
राजस्थान सरकार तीन हफ्ते में अपना जवाब दाखिल करे
नई दिल्ली। सुप्रीम कोर्ट ने मंगलवार को 2013 के नाबालिग से यौन उत्पीड़न मामले में आसाराम बापू की जमानत याचिका पर तत्काल कोई राहत देने से इंकार किया है। जस्टिस एमएम सुंदरेश और शील नागू की बेंच ने राजस्थान सरकार से याचिका पर जवाब मांगा है, जिसमें आसाराम ने जोधपुर में नाबालिग के यौन उत्पीड़न मामले में राजस्थान हाईकोर्ट के फैसले को चुनौती दी है। सुप्रीम कोर्ट ने साफ किया कि वह राज्य का पक्ष सुने बिना या जब तक आसाराम की सेहत स्पष्ट रूप से बेहद गंभीर न हो जाए, जमानत देने के पक्ष में नहीं है।
यह मामला अगस्त 2013 का है, जब आरोप लगा था कि आसाराम बापू के जोधपुर आश्रम में नाबालिग भक्त को गलत तरीके से बंधक बनाकर यौन उत्पीड़न किया था। एक ट्रायल कोर्ट ने आसाराम बापू को रेप और संबंधित अपराधों के लिए दोषी माना था, जिसकी सजा को साल 2026 मई में राजस्थान हाईकोर्ट ने बरकरार रखा। हालांकि, हाईकोर्ट ने आपराधिक साजिश और गैंग रेप के आरोपों से आसाराम और सह-आरोपियों को बरी कर दिया था। इसके बाद यह मामला सुप्रीम कोर्ट पहुंचा है।
आसाराम की ओर से पेश हुए वरिष्ठ अधिवक्ता डीएस नायडू ने सुप्रीम कोर्ट से उनकी मेडिकल कंडीशन पर विचार करने की अपील की। वकील नायडू ने बताया कि आसाराम अब 90 साल के हैं और विभिन्न स्वास्थ्य समस्याओं से जूझ रहे हैं, जिनका इलाज आयुर्वेदिक अस्पताल में हुआ है। उन्होंने सोशल मीडिया ट्रायल को लेकर चिंता जताकर कोर्ट को ही अपनी एकमात्र उम्मीद बताया।
राजस्थान सरकार के वकील ने किसी भी तरह की अंतरिम राहत देने का कड़ा विरोध किया। उन्होंने कहा कि यह मामला एक नाबालिग पीड़िता से जुड़ा है और आसाराम को आवश्यकता पड़ने पर अस्पताल ले जाया गया था। उन्होंने स्पष्ट किया कि इस स्तर पर उन्हें जमानत पर रिहा करने की कोई आवश्यकता नहीं है।
सुप्रीम कोर्ट ने आखिर में निर्देश दिया कि आसाराम को दी जा रही मेडिकल सुविधाएं जारी रह सकती हैं। बेंच ने कहा कि अंतरिम जमानत के सवाल पर राज्य का पक्ष सुनने के बाद ही विचार होगा। हालांकि, कोर्ट ने यह भी जोड़ा कि अगर आसाराम की तबीयत बेहद गंभीर हो जाती है और जान बचाने की नौबत आती है, तब तत्काल राहत के लिए मामले का उल्लेख किया जा सकता है। सुप्रीम कोर्ट ने राजस्थान सरकार को तीन हफ्ते में अपना जवाब दाखिल करने को कहा है।
