
जबलपुर। विशेष न्यायाधीश (लोकायुक्त) मनीष सिंह ठाकुर की अदालत ने मध्यप्रदेश पूर्व क्षेत्र विद्युत वितरण कंपनी, जोन-2 के तत्कालीन कनिष्ठ अभियंता कमलेश कसेरा को रिश्वत लेने के मामले में दोषी ठहराते हुए भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम की धारा 7 के तहत चार वर्ष के सश्रम कारावास तथा 10 हजार रुपये के अर्थदंड की सजा सुनाई है।लोकायुक्त की ओर से विशेष लोक अभियोजक प्रशांत शुक्ला ने न्यायालय में प्रभावी पैरवी की।अभियोजन के अनुसार, फरियादी सतीश चंद्र वंशकार ने 18 फरवरी 2021 को पुलिस अधीक्षक, लोकायुक्त जबलपुर से शिकायत की थी कि 15 फरवरी 2021 को आरोपी ने उनके भाई की किराना दुकान पर विद्युत चोरी की कार्रवाई करते हुए मामला उनके पिता के नाम दर्ज किया। इसके बाद प्रकरण समाप्त करने के बदले आरोपी ने 10 हजार रुपये रिश्वत की मांग की। आरोपी ने पहले 5 हजार रुपये ले लिए और शेष राशि बाद में देने को कहा।शिकायत के सत्यापन के बाद लोकायुक्त टीम ने 22 फरवरी 2021 को कांचघर स्थित विद्युत वितरण कंपनी के कार्यालय में ट्रैप कार्रवाई की। इस दौरान आरोपी 5 हजार रुपये की रिश्वत लेते हुए रंगे हाथों गिरफ्तार किया गया। रिश्वत की राशि आरोपी के पर्स से बरामद हुई। आरोपी के हाथ एवं पर्स को सोडियम कार्बोनेट घोल से धुलाने पर घोल का रंग गुलाबी हो गया, जिससे रिश्वत लेने की पुष्टि हुई।साक्ष्यों एवं गवाहों के आधार पर विशेष न्यायालय ने आरोपी को दोषसिद्ध कर चार वर्ष के कारावास एवं 10 हजार रुपये के अर्थदंड से दंडित किया।
