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पूछा- न्यायिक अधिकारी की सुरक्षा के लिए अब तक क्या किया ?

जबलपुर। मध्य प्रदेश उच्च न्यायालय के न्यायाधीश विवेक अग्रवाल तथा न्यायाधीश अवनीन्द्र कुमार सिंह की संयुक्तपीठ ने नर्मदापुरम जिले में गौहत्या से जुड़े बहुचर्चित मामले में 14 आरोपियों को उम्रकैद की सजा सुनाने वाली महिला जज को लगातार मिल रही धमकियों पर सख्त रुख अपनाते हुए राज्य सरकार के गृह विभाग के एडिशनल चीफ सेक्रेटरी (एसीएस) और पुलिस महानिदेशक (डीजीपी) से हलफनामे पर जवाब मांगा है कि न्यायिक अधिकारी की सुरक्षा के लिए अब तक क्या-क्या कदम उठाए गए हैं। मामले की अगली सुनवाई 9 जुलाई को नसत की गई है।
उच्च न्यायालय ने वर्ष 2016 से लंबित न्यायिक अधिकारियों की सुरक्षा संबंधी जनहित याचिका पर सुनवाई के दौरान ही सिवनी मालवा में पदस्थ महिला न्यायिक अधिकारी तबस्सुम खान को मिल रही धमकियों का स्वतः संज्ञान लिया। उक्त महिला जज ने 12 जून 2026 को गौहत्या से जुड़े वर्ष 2023 के चर्चित मामले में 14 आरोपियों को आजीवन कारावास की सजा सुनाई थी। इस फैसले के बाद उन्हें सोशल मीडिया पर लगातार आपत्तिजनक और भड़काऊ संदेश तथा धमकियां मिलने लगीं। इस पर न्यायालय ने मामले को गंभीरता से लेते हुए राज्य सरकार से विस्तृत जवाब- तलब कर लिया। मामले में सुनवाई के दौरान महाधिवक्ता प्रशांत सिंह और उप महाधिवक्ता अभिजीत अवस्थी ने संयुक्तपीठ को अवगत कराया कि महिला जज की सुरक्षा के लिए 1-5 की सशस्त्र सुरक्षा उपलब्ध कराई गई है। साथ ही सोशल मीडिया पर प्रसारित आपत्तिजनक पोस्ट और संदेश हटाने के लिए भी आवश्यक कार्रवाई की जा रही है। इसके बाद न्यायालय ने एडिशनल चीफ सेक्रेटरी (गृह) और डीजीपी को निर्देश दिया है कि वे हलफनामा दाखिल कर बताएं कि महिला न्यायिक अधिकारी की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए अब तक कौन-कौन से ठोस कदम उठाए गए हैं।

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