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एनसीईआरटी ने कक्षा 7वीं की किताबों से हटाए मुगल साम्राज्य और महाभारत के सभी चेप्टर
भोपाल। देश में लागू की गई नई शिक्षा नीति के तहत अब निजी स्कूलों में भी एनसीईआरटी की किताबें लागू कर दी गई हैं। इसके साथ ही एनसीईआरटी ने इस साल जनवरी में ही कक्षा पांचवी, छठवीं, सातवीं और आठवीं का सिलेबस बदलने की घोषणा कर दी थी। अब बाजार में नए सिलेबस की नई किताबें आ चुकी हैं। लेकिन इन किताबों में पुरानी किताबों से काफी अधिक भिन्नता है। विशेष कर कक्षा सातवीं की किताबों में पूरा का पूरा सिलेबस ही बदल दिया गया है। वहीं मध्य प्रदेश में किताब में मुगल काल की जगह मध्य प्रदेश की संस्कृति सहित अन्य ज्ञानवर्धक सब्जेक्ट को शामिल किया गया है।
पिछले वर्ष तक चल रही एनसीईआरटी की कक्षा सातवीं की किताबों में इतिहास की किताब में चैप्टर 4 में पेज नंबर 37 से लेकर पेज नंबर 48 तक 12 पेज में केवल मुगल साम्राज्य जिक्र था। इन पेजों में 16 वीं एवं 17 वीं शताब्दी का दौर दिखाया गया था। जिसमें जहांगीर से लेकर बहादुर शाह जफर तक के कार्यकाल का उल्लेख किया गया। इसमें मुगल काल की मुद्राएं, वहां की शासन व्यवस्था, वास्तु कला, धर्म, संस्कृति आदि का उल्लेख किया गया था।
नए सिलेबस में मौसम, जलवायु, व्यवसाय शामिल
इसी तरह चैप्टर 8 में 18 वीं शताब्दी की राजनीति एवं मुगल साम्राज्य के बारे में पेज नंबर 94 से लेकर पेज नंबर 104 तक विस्तार से वर्णन किया गया। लेकिन सरकार ने इस साल लागू की नई शिक्षा नीति के तहत पूरा सिलेबस बदल दिया है। नए सिलेबस में मुगल साम्राज्य को हटाकर मौसम, जलवायु, भौगोलिक परिवर्तन, भारतीय संविधान, बाजार की समीक्षा, व्यवसाय सहित कई अन्य विषयों को विस्तृत रूप में शामिल किया गया है।
महाभारत की पूरी किताब की अलग
290 पेज वाली इस किताब में तीन विषयों को एक साथ जोडक़र एक बनाया गया है। उसी में यह सारे के सारे विषय शामिल किए गए हैं। जिसमें नई तकनीक नए तरीके बाजारबाद की नई व्यवस्थाएं एवं अन्य प्रमुख सामग्रियां शामिल की गई हैं। किताबों से सिर्फ मुगलों का इतिहास ही नहीं हटाया गया है बल्कि महाभारत की एक पूरी किताब भी अलग कर दी गई है। महाभारत की एक किताब ही थी जिसमें ज्ञानवर्धक और रोचक जानकारियां दी गई थीं, लेकिन इस किताब को हटाकर अब एक अन्य किताब लागू की गई है। जिसमें दूसरे अन्य समसामयिक विषयों को शामिल किया गया है।
50 वर्ष से पढ़ रहे हैं मुगलों को
शिक्षाविदों को कहना है कि परिवर्तन संसार का नियम है। हमें सबसे पहले यह समझना होगा कि यह नई शिक्षा नीति नहीं है, यह राष्ट्रीय शिक्षा नीति है। इसका सबसे महत्वपूर्ण उद्देश्य यह है कि व्यक्ति से ऊपर राष्ट्र है। इसका अर्थ यह है कि यदि हम 50 वर्ष से मुगलों को पढ़ रहे हैं, हमने अकबर को पढ़ा, बाबर को पढ़ा। लेकिन इस काल में ऐसी उपलब्धियों को जाने जो ज्ञान के नाम पर विज्ञान के नाम पर, राष्ट्र के नाम पर संग्रहित हैं। तो उनसे सीखना जरूरी है। व्यक्ति की जगह हम ज्ञान को महत्व देंगे। अपनी विरासत पर महत्व देंगे।

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