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बालाघाट। मुख्यमंत्री डॉ मोहन यादव सोमवार को बालाघाट जिले के लांजी के प्रवास पर रहे। लेकिन उन्होंने हाल ही में हट्टा थाना क्षेत्र में चार आदिवासी नाबालिग बालिकाओं के साथ हुए सामूहिक बलात्कार की जघन्य घटना पर एक शब्द भी नहीं बोले। इतना ही नहीं पीडि़त परिवारों से मिलने भी नहीं गए। क्या मुख्यमंत्री का यह मौन उन आदिवासी परिवारों के दर्द और पीड़ा के प्रति उनकी उदासीनता को दर्शाता है? जो इस अमानवीय अपराध के बाद न्याय की आस में है।
बैहर विधायक संजय उईके ने कहा कि मुख्यमंत्री ने लांजी में अपने दौरे के दौरान विभिन्न विकास योजनाओं और जनकल्याणकारी घोषणाओं पर लंबे-चौड़े भाषण दिए। लेकिन पीडि़त परिवारों से मिलने या उनके लिए कोई सहायता, न्याय की घोषणा करने में उनकी क्या मजबूरी थी? उन्होंने कहा कि मध्य प्रदेश में आदिवासी समाज की बेटियों के साथ हो रहे अत्याचारों पर सरकार की चुप्पी अपराधियों के हौसले बढ़ा रही है? सीएम का यह व्यवहार दर्शाता है कि उनकी प्राथमिकता केवल राजनीतिक लाभ और प्रचार है न कि समाज के सबसे कमजोर वर्गों को न्याय दिलाना?
उन्होंने सीएम पर आरोप लगाया है कि वे जानबूझकर इस संवेदनशील मुद्दे पर चुप्पी साधे रहे। ताकि उनकी सरकार की नाकामियों और पुलिस-प्रशासन की लापरवाही पर कोई सवाल न उठे। इस घटना पर 8 मई 2025 को मध्यप्रदेश आदिवासी विकास परिषद और आदिवासी समाज द्वारा जन आक्रोश रैली के माध्यम से पीडि़त परिवारों को 1 करोड़ रुपये की आर्थिक सहायता और दोषियों को कड़ी सजा देने की मांग की गई थी। फिर भी मुख्यमंत्री ने इस दौरे में न तो पीडि़त परिवारों से मुलाकात की और न ही कोई ठोस आश्वासन दिया। यह उनकी संवेदनहीनता और आदिवासी समाज के प्रति उनकी उपेक्षा को स्पष्ट करता है। उन्होंने कहा कि यह सरकार केवल आदिवासियों के वोट लेने के लिए जनजातीय गौरव की बातें करती है, लेकिन जब उनके साथ अन्याय होता है, तो वह खामोश रहती है। मध्य प्रदेश सरकार के लिए आदिवासी समाज की बेटियों की इज्जत और सुरक्षा कोई मायने नहीं रखती? यह सरकार केवल दिखावे के लिए बेटी बचाओ, बेटी पढ़ाओ का नारा देती है, जबकि वास्तव में बेटियों के साथ हो रहे अत्याचारों पर चुप्पी साध लेती है। सीएम की खामोशी से पीडि़त परिवारों में सरकार के प्रति अविश्वास बढ़ेगा और समाज में यह संदेश जाएगा कि आदिवासी बेटियों के साथ अन्याय होने पर सरकार उनके साथ नहीं खड़ी होती है। उन्होंने कहा कि भाजपा सरकार आदिवासी समाज की बेटियों के साथ हो रहे अत्याचारों को लेकर पूरी तरह असंवेदनशील है। मुख्यमंत्री का लांजी दौरा जिसमें उन्होंने जनता को लुभाने के लिए बड़ी-बड़ी बातें की, लेकिन असल मुद्दों को नजरअंदाज किया। यह सरकार बार-बार दावा करती है कि वह महिलाओं और आदिवासियों की सुरक्षा के लिए प्रतिबद्ध है, लेकिन हकीकत में उनकी नीतियां और कार्यशैली अपराधियों को संरक्षण दे रही हैं।

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