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कानून का डंडा चलते ही सर्कुलर जारी, दौरे को लेकर दिशा-निर्देश जारी
मुंबई। महाराष्ट्र के सपूत भूषण गवई ने देश के 52वें मुख्य न्यायाधीश के रूप में शपथ ली। मुख्य न्यायाधीश के रूप में शपथ लेने के बाद उन्हें मुंबई और गोवा बार एसोसिएशन की ओर से मुंबई में सम्मानित करने के लिए मुंबई आने का न्यौता दिया गया था जिसके बाद वे हाल ही में पहली महाराष्ट्र पहुंचे। मगर मुख्य न्यायाधीश जब पहली बार महाराष्ट्र के दौरे पर थे, तब उन्होंने खुले तौर पर इस बात पर अपनी नाराजगी व्यक्त की कि प्रोटोकॉल के अनुसार उनका स्वागत करने के लिए राज्य सचिव, पुलिस महानिदेशक और मुंबई पुलिस आयुक्त में से कोई भी मौजूद नहीं था। साथ ही मुख्य न्यायाधीश ने अनुच्छेद 142 का भी जिक्र करते हुए कहा था कि वह प्रोटोकॉल के लिए ऐसा नहीं कह रहे हैं, बल्कि एक संवैधानिक संस्था के प्रमुख के तौर पर उस पद की गरिमा बनाए रखी जानी चाहिए। इसके बाद अब महाराष्ट्र सरकार ने इस घटना का संज्ञान लेते हुए मुख्य न्यायाधीश को स्थायी राजकीय अतिथि घोषित कर दिया है। इसके लिए बकायदा एक परिपत्र जारी किया गया है जिसमें बताया गया है कि अब से मुख्य न्यायाधीश (सीजेआई) के दौरे के दौरान क्या करना है और किस प्रोटोकॉल का पालन करना है। उधर मुख्य न्यायाधीश द्वारा अपनी नाराजगी व्यक्त करने के बाद, राज्य के शीर्ष अधिकारी दादर स्थित चैत्यभूमि गए और मुख्य न्यायाधीश का स्वागत किया। हालांकि इस घटना के बाद विपक्षी पार्टी के नेताओं ने राज्य सरकार पर निशाना साधा है। साथ ही, कांग्रेस नेता और विधायक नाना पटोले ने राष्ट्रपति को पत्र लिखकर मुख्य सचिव, पुलिस महानिदेशक और पुलिस आयुक्त के खिलाफ मुख्य न्यायाधीश की अवमानना ​​के लिए कार्रवाई की मांग की है। उसके बाद अब राज्य सरकार ने देश के मुख्य न्यायाधीश को स्थायी राजकीय अतिथि घोषित कर दिया है। इसलिए, अब से मुख्य न्यायाधीश की यात्रा के लिए विशेष प्रोटोकॉल लागू रहेंगे। तदनुसार, राज्य सरकार ने मुख्य न्यायाधीश की महाराष्ट्र यात्रा के दौरान अपनाए जाने वाले शिष्टाचार के संबंध में दिशा निर्देश भी जारी किए हैं और संबंधितों को एक परिपत्र भेजा गया है।

  • राज्य सरकार ने क्या दिशा-निर्देश दिए?
  • भारत के मुख्य न्यायाधीश को अब स्थायी राजकीय अतिथि घोषित किया गया
    मुख्य सचिव या उनके प्रतिनिधि, पुलिस महानिदेशक या उनके प्रतिनिधि मुंबई में मुख्य न्यायाधीश का स्वागत करेंगे।
  • राज्य के अन्य जिलों में जिला कलेक्टर या उनके वरिष्ठ प्रतिनिधि, पुलिस कमिश्नर, पुलिस अधीक्षक या उनके प्रतिनिधि उपस्थित रहेंगे।
  • यदि कोई वीवीआईपी आ रहे हैं तो पूर्व आदेश के अनुसार उनके विभाग से संपर्क बनाए रखने के लिए समन्वय अधिकारी नियुक्त करना अनिवार्य है। इसलिए, मुख्य न्यायाधीश की यात्रा के दौरान, विधि एवं न्याय विभाग के लिए मुंबई के लिए तथा जहां भी लागू हो, जिला कलेक्टरों के लिए समन्वय के लिए प्रथम श्रेणी के अधिकारी की नियुक्ति करना अनिवार्य होगा।

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