कोटा में ही बच्चे आत्महत्या क्यों कर रहे, आप निपटने के लिए क्या कर रहे

नई दिल्ली। सुप्रीम कोर्ट ने कोचिंग नगरी कोटा में छात्रों की आत्महत्याओं में वृद्धि के संबंध में राजस्थान की भजनलाल सरकार से कई सवाल पूछे। सुप्रीम कोर्ट ने सवाल किया कि, कोटा में ही बच्चे आत्महत्या क्यों कर रहे हैं। भजनलाल सरकार इससे निपटने के लिए क्या उपाय कर रही है।
यह मामला जस्टिस जेबी पारदीवाला और न्यायमूर्ति आर महादेवन की पीठ के सामने लाया गया। सुप्रीम कोर्ट की बेंच ने राजस्थान सरकार के वकील से पूछा कि, आप एक राज्य के तौर पर क्या कर रहे हैं? ये बच्चे आत्महत्या क्यों कर रहे हैं और केवल कोटा में ही क्यों सुसाइड कर रहे हैं? इस पर राज्य सरकार के वकील ने दलील दी कि आत्महत्या के मामलों की जांच के लिए एक विशेष जांच दल (एसआईटी) का गठन कर कोटा मामले में जांच जारी है। बेंच ने कोटा आत्महत्या मामले में एफआईआर दर्ज न करने पर असंतोष जाहिर किया।
सुप्रीम कोर्ट की बेंच ने राज्य के वकील से पूछा कि, कोटा में अब तक कितने युवा छात्रों की मौत हुई है। इस पर वकील ने बताया कि 14 मामले दर्ज किए गए हैं। सुप्रीम कोर्ट ने वकील से पूछा कि, ये छात्र क्यों मर रहे हैं…राजस्थान सरकार कोर्ट के फैसले की अवमानना कर रही है। बेंच ने वकील से पूछा कि, राज्य सरकार ने मामले में एफआईआर क्यों दर्ज नहीं की।
बेंच को बताया गया कि छात्रा संस्थान के आवास में नहीं रह रही थी, छात्र ने नवंबर 2024 में छोड़ दिया था, और अपने माता-पिता के साथ रह रही थी। पीठ ने 14 जुलाई को कोटा मामले में पुलिस अधिकारी को तलब कर कहा कि, कोर्ट के निर्णय के अनुसार, एफआईआर दर्ज करना और जांच करना संबंधित पुलिस का कर्तव्य था। सुप्रीम कोर्ट आईआईटी खड़गपुर में पढ़ने वाले एक 22 साल के छात्र की मौत के मामले में सुनवाई कर रहा था। 4 मई को छात्र अपने छात्रावास के कमरे में फांसी के फंदे से लटका मिला था। वहीं एक अन्य मामले की भी सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई हुई, जिसमें एक लड़की नीट की परीक्षा देने वाली थी और वह कोटा में अपने कमरे में मृत मिली। लड़की अपने माता-पिता के साथ रहती थी।
