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दमोह: मध्य प्रदेश शासन संस्कृति विभाग के निर्देशानुसार लोकमाता देवी अहिल्याबाई होल्कर की 300 वीं जन्म जयंती के अवसर पर शुक्रवार को प्रधानमंत्री कॉलेज ऑफ एक्सीलेंस, दमोह में एक भव्य सांस्कृतिक कार्यक्रम का आयोजन किया गया। इस अवसर पर ‘लोकमाता अहिल्याबाई’ नाटक का मंचन युवा नाट्य मंच दमोह द्वारा प्रस्तुत किया गया। कार्यक्रम मध्यप्रदेश राज्य पिछड़ा वर्ग आयोग के अध्यक्ष डॉ. रामकृष्ण कुसमरिया के मुख्य अतिथि में संपन्न हुआ । कार्यक्रम की अध्यक्षता जिला पंचायत अध्यक्ष रंजीता पटेल ने की।राज्य पिछड़ा वर्ग आयोग के अध्यक्ष डॉ. कुसमरिया ने संबोधित करते हुये कहा मैं देवी अहिल्याबाई के जीवन, संघर्ष, प्रशासनिक क्षमता और उनके द्वारा किए गए सामाजिक व धार्मिक कार्य प्रेरणादायी है। उनकी नीतियों और जनहितकारी योजनाओं से सीख लेकर अनेक जनहित योजनाओं में कार्य हो रहा है।जिला पंचायत अध्यक्ष रंजीता पटैल ने अपने उद्बोधन में कहा कि अहिल्याबाई होल्कर का जीवन करुणा, सेवा और धर्म की स्थापना के लिए समर्पित था। उनके शासनकाल में नारी उत्थान, जल संरक्षण और तीर्थस्थलों के पुनर्निर्माण जैसे कार्य उनके दूरदर्शी प्रशासन की मिसाल हैं। उन्होंने अपील की प्रदेश में चल रहे जल गंगा संवर्धन अभियान के अंतर्गत प्राचीन बावड़ियों की सफाई कर उन्हें लोकमाता अहिल्याबाई को समर्पित किया जाए। कार्यक्रम में डॉ. सोनल राय, मुख्य कार्यपालन अधिकारी प्रवीण फुलपगारे और अपर कलेक्टर मीना मसराम विशेष रूप से उपस्थित रहीं।कार्यक्रम के दौरान सामाजिक संगठनों, गणमान्य नागरिकों एवं विशेष रूप से महिला शक्ति की उल्लेखनीय सहभागिता रही। विद्यालयों और महाविद्यालयों के छात्र-छात्राओं ने भी उत्साहपूर्वक भाग लिया।

             रंगमंच के क्षेत्र में अग्रणी संस्था युवा नाट्य मंच दमोह के कलाकारों द्वारा  देवी अहिल्याबाई के कृतित्व एवं व्यक्तित्व पर आधारित नाटक  ‘लोकमाता अहिल्याबाई’ की जीवंत और प्रभावी प्रस्तुति की गई। नाटक में अहिल्याबाई की बचपन से लेकर मालवा साम्राज्य को सम्भालने, उनके जनहित के क्षेत्र में किए गए कार्य, सामाजिक समरसता उद्योग धंधे नारी सशक्तिकरण जैसे महत्वपूर्ण कार्यों का उल्लेख नाटक के मंचन में किया गया। प्रभावी प्रस्तुति और पात्रों के सजीव अभिनय ने सभी दर्शकों को मंत्रमुग्ध कर दिया। दर्शकों ने कलाकारों की भूमिका और नाट्य मंचन की भूरी-भूरी प्रशंसा की। कार्यक्रम का आभार शिक्षिका श्रुति राजपूत द्वारा किया गया।

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