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किसी तथ्य की पुष्टि हेतु एक विश्वसनीय साक्षी पर्याप्त होता है – न्यायालय

दमोह। अपर सत्र न्यायाधीश श्री संतोष गुप्ता की अदालत ने दुकान में घुसकर जानलेवा हमला करने के प्रकरण में आरोपी आकाश उर्फ कांचा दुबे को दोषी पाते हुए भारतीय दंड संहिता की धारा 307 में 5 वर्ष का सश्रम कारावास तथा धारा 450 में 2 वर्ष का सश्रम कारावास एवं एक हजार रुपए के अर्थदंड से दंडित किया है। शासन की ओर से प्रकरण में प्रभावी पैरवी शासकीय अभिभाषक श्री राजीव बद्री सिंह ठाकुर द्वारा की गई।

यह घटना थाना कोतवाली क्षेत्र अंतर्गत 16 जनवरी 2020 की है। रात्रि 8 बजे बलराम सेन अपनी “राहुल मेंस पार्लर” नामक दुकान बंद करने ही वाले थे कि उसी समय आरोपी आकाश उर्फ कांचा दुबे (22 वर्ष) निवासी सिविल वार्ड क्रमांक 4 एवं मयंक सैनी (22 वर्ष) निवासी सिविल वार्ड क्रमांक 8, दमोह वहां पहुंचे और बलराम को गालियां देने लगे। उन्होंने पूछा कि राहुल कहां है? बलराम ने उत्तर दिया कि वह दुकान पर नहीं है, तब दोनों ने बलराम को पकड़ लिया और कहा – “तू राहुल को छिपा रहा है, आज तुझे ही खत्म कर देते हैं”। इसके बाद आकाश ने अपनी जेब से चाकू निकालकर बलराम के कंधे एवं पीठ में जानलेवा वार किए। हमले के पश्चात दोनों आरोपी वहां से फरार हो गए।

घायल बलराम की रिपोर्ट पर थाना कोतवाली में अपराध पंजीबद्ध किया गया एवं उन्हें उपचार हेतु अस्पताल भेजा गया। प्रकरण में न्यायालय में विचारण के दौरान अभियोजन द्वारा प्रस्तुत साक्ष्यों के आधार पर आरोपी आकाश दुबे को दोषी ठहराया गया। यद्यपि स्वतंत्र साक्षीगण ने अभियोजन की पुष्टि नहीं की और कुछ साक्ष्य विरोधाभासी भी प्रतीत हुए, फिर भी न्यायालय ने स्पष्ट किया कि साक्ष्य अधिनियम के अनुसार किसी तथ्य की पुष्टि हेतु एक विश्वसनीय साक्षी पर्याप्त होता है। साक्षियों के कथनों में समय के अंतराल, स्मरण शक्ति एवं निरीक्षण क्षमता के कारण भिन्नता स्वाभाविक मानी गई। अभियोजन ने साक्ष्य से संतुष्ट होकर न्यायालय ने आरोपी आकाश दुबे को धारा 307 (हत्या का प्रयास) में 5 वर्ष का सश्रम कारावास तथा धारा 450 (गृहभेदन) में 2 वर्ष का सश्रम कारावास एवं एक हजार रुपए के अर्थदंड से दंडित किया। वहीं आरोपी मयंक सैनी को संदेह का लाभ देते हुए दोषमुक्त कर दिया।

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