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पीड़िता की सहमति धोखे और भ्रम पर आधारित थी, अतः वह स्वतंत्र सहमति नहीं मानी जा सकती _ न्यायालय

दमोह – न्यायाधीश श्री संतोष गुप्ता की अदालत ने एक महत्वपूर्ण निर्णय में आरोपी श्रीराम सिंह (30 वर्ष), निवासी ग्राम निबोरा कला (केरवना), थाना बटियागढ़ को भारतीय दंड संहिता की धारा 376 (बलात्कार) के तहत दोषसिद्ध पाते हुए 10 वर्ष के सश्रम कारावास एवं एक हजार रुपए के जुर्माने से दंडित किया है।
प्रकरण में शासन की ओर से पैरवी शासकीय अभिभाषक राजीव बद्री सिंह ठाकुर द्वारा की गई। वर्ष 2022 में आरोपी श्रीराम सिंह ने फेसबुक के माध्यम से पीड़िता से संपर्क कर स्वयं को कुंवारा बताते हुए दोस्ती की। कुछ समय पश्चात वह पीड़िता के घर आने-जाने लगा और उसके पिता के समक्ष विवाह का प्रस्ताव रखा, जिसे स्वीकार कर लिया गया। आरोपी कई बार पीड़िता के साथ शारीरिक संबंध बनाता रहा। बाद में सरपंची चुनाव का बहाना बनाकर विवाह को टालता गया और फिर अचानक पीड़िता से संपर्क तोड़ दिया। जब पीड़िता ने पुनः विवाह की बात की, तो आरोपी ने गाली-गलौच कर यह स्वीकार किया कि वह पहले से शादीशुदा है और विवाह नहीं करेगा। साथ ही जान से मारने की धमकी भी दी।

पीड़िता द्वारा महिला थाना दमोह में की गई शिकायत पर पुलिस ने FIR दर्ज कर आरोपी के विरुद्ध प्रकरण न्यायालय में प्रस्तुत किया। अभियोजन की सशक्त साक्ष्य प्रस्तुति के आधार पर न्यायालय ने माना कि पीड़िता की सहमति धोखे और भ्रम पर आधारित थी, अतः वह स्वतंत्र सहमति नहीं मानी जा सकती। सुप्रीम कोर्ट के प्रासंगिक निर्णयों का हवाला देते हुए यह स्पष्ट किया गया कि ऐसे मामलों में सहमति का खंडन करने का उत्तरदायित्व आरोपी पर होता है, जो वह पूरा नहीं कर पाया।

विलंब से रिपोर्ट दर्ज कराने को न्यायालय ने प्राकृतिक यह कहते हुए माना कि बलात्कार पीड़िताएं सामाजिक भय एवं मानसिक दबाव के चलते सोच-विचार कर ही शिकायत दर्ज कराती हैं। निर्णय पश्चात आरोपी को सजा भुगताने हेतु जेल भेज दिया गया, जेल जाने से उसके सरपंच पद पर भी संकट उत्पन्न हो गया है।

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