कोर्ट ने फटकार लगाते सरकार पर लगाई पांच हजार की कास्ट

इन्दौर । प्रदेश उच्च न्यायालय खंडपीठ इन्दौर में जस्टिस पवनकुमार द्विवेदी की अवकाशकालीन एकल पीठ ने सरकारी कर्मचारियों और अधिकारियों द्वारा किए जा रहे अजीबोगरीब लापरवाही के मामले में सुनवाई करते सरकार पर 5 हजार की कास्ट लगाते याचिकाकर्ता महिलाकर्मी को उसका बकाया वेतन तत्काल ब्याज सहित देने के आदेश दिए हैं। मामला सरकार के स्वास्थ्य विभाग का होकर एक जैसे नाम की गफलत में एक महिलाकर्मी को गत छह माह से वेतन ही नहीं दिए जाने का है। महिला कर्मी द्वारा एडवोकेट मेघा जैन के मार्फत दायर याचिका पर हाईकोर्ट की अवकाशकालीन बेंच ने सुनवाई उपरांत आदेश दिया कि उक्त गलती को तत्काल सुधारकर 15 दिन में बकाया वेतन और 9 प्रतिशत वार्षिक ब्याज के साथ याचिकाकर्ता को भुगतान करे। उससे अधिक विलंब होने पर 18 प्रतिशत ब्याज देना होगा। इसी के साथ कोर्ट ने उक्त गलती सुधारने में इतना विलंब किए जाने को लेकर राज्य सरकार पर 5 हजार रुपए कॉस्ट भी लगाई। प्रकरण कहानी संक्षेप में इस प्रकार है कि विमला वर्मा पति अशोक ने एडवोकेट मेघा जैन के माध्यम से याचिका दायर कर कोर्ट को बताया कि वर्ष 1989 से वह विभाग में पदस्थ है। उसी के विभाग में समान पद पर एक अन्य विमला वर्मा पति शांतिलाल कार्यरत थी जिसकी मौत 8 अप्रैल 2021 को हो गई थी। उसके एरियर के भुगतान के लिए प्रक्रिया चल रही थी। इस दौरान विभाग के सॉफ्टवेयर में याचिकाकर्ता के नाम के आगे मृतका का यूनिक कोड गलती से अपलोड हो गया जिसके कारण गत जनवरी 2025 से याचिकाकर्ता की सेलरी मिलना बंद हो गई। जब उन्होंने पता लगाया तो उक्त तथ्य सामने आने के बाद विभागीय स्तर पर अनेक बार दस्तावेजों सहित गुहार की लेकिन विभाग एवं ट्रेजरी के बीच मामला झूलता रहा। विभाग ने न तो गलती सुधारों और न ही आज तक याचिकाकर्ता को सेलरी दी। कोर्ट ने अपने आदेश में इसको अत्यंत खेदजनक स्थिति बताने के साथ कहा कि विभाग में नियमित रूप से काम करने वाले एक कर्मचारी को बार-बार पत्राचार के बाद भी संबंधित प्राधिकारी द्वारा गलती ठीक नहीं की जा रही एवं छह माह की लंबी अवधि से वेतन का भुगतान नहीं किया जा रहा है। इस सुस्ती के परिणामस्वरूप याचिकाकर्ता के सम्मान के साथ जीवन जीने के मौलिक अधिकारों पर गंभीर प्रतिकूल प्रभाव पड़ा है। इसके साथ ही विभाग को तत्काल वेतन भुगतान करने का आदेश दे सरकार पर कास्ट लगाई।
