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प्रदेश के सबसे बड़े सरकारी कर्मचारी संगठन ने बड़ी मांग सरकार से की

भोपाल । मध्यप्रदेश में भ्रष्टाचार और रिश्वतखोरी को रोकना सरकार के लिए बड़ी चुनौती बना हुआ है। बीते साल के आंकड़े बताते हैं कि लोकायुक्त टीम ने 238 मामलों में रंगे हाथों रिश्वतखोरों को पकड़ा। बीते छह माह में 100 से ज्यादा मामले सामने आ चुके हैं। बड़ी बात यह है कि भ्रष्टाचार और रिश्वतखोरी को लेकर शिकायतों के अलग-अलग मंचों पर पीडि़तों के आवेदनों की संख्या दो हजार के भी पार है। प्रदेश को भ्रष्टाचार की जद में देख प्रदेश के सबसे बड़े सरकारी कर्मचारी संगठन ने बड़ी मांग सरकार से की है। यह मांग है निर्वाह भत्ता बंद करने की। यह वहीं भत्ता है जो निलंबन के बाद संबंधित दोषी अधिकारी-कर्मचारी को दिया जाता है। इसे लेकर मुख्यमंत्री डॉ मोहन यादव को पत्र भी लिखा गया है।
तृतीय वर्ग शासकीय कर्मचारी संघ के महामंत्री उमाशंकर तिवारी ने बताया कि प्रदेश में भ्रष्टाचारियों और रिश्वतखोर सरकारी मुलाजिमों पर सरकार उपकार करती है। पहले तो शिकायतों पर कार्रवाई कर निलंबन फिर निर्वाह भत्ता भी सरकार ही देती है। यह संबंधित दोषी कर्मचारी या अधिकारी को जीवन यापन के लिए दिया जाता है। निलंबन सजा के दौर किया जाता है तो निर्वाह भत्ता की आवश्यकता क्यों।
उमाशंकर तिवारी ने यह भी बताया कि इस भत्ते के कारण भ्रष्टों पर कोई असर भी नहीं पड़ता। साथ ही रिश्वतखोरी को बढ़ावा मिलता है। दूसरी बात यह भी कि रिश्वतखोर या भ्रष्टाचारी का खुलासा तब होता है जब इसका खुलासा होता है। जबकि सालों तक ऐसे ही भ्रष्ट अधिकारी-कर्मचारी लूट करते हैं। उन्होंने यह भी बताया कि भत्ता की रकम जनता की पसीने की कमाई से ही सरकार के द्वारा दी जाती है। लिहाजा किसी भ्रष्टाचारी को जनता के हिस्सा का पैसा आखिर क्यों दिया जाए।
क्या होता है निर्वाह भत्ता
यदि निलंबन 90 दिनों के लिए है, तो कर्मचारियों को उनके वेतन का 50 प्रतिशत निर्वाह भत्ते के रूप में मिलता है। यदि यह निलंबन 90 दिनों से अधिक समय तक जारी रहता है तो निर्वाह भत्ता वेतन का 75 प्रतिशत होगा। निर्वाह भत्ते में एसआरए, महंगाई भत्ता या कोई अन्य विशेष वेतन जैसे भत्ते शामिल नहीं हैं। निर्वाह भत्ते की राशि किसी कर्मचारी के मूल वेतन से अधिक नहीं होनी चाहिए।
एक मत कांग्रेस और बीजेपी
निर्वाह भत्ता बंद करने को लेकर कांग्रेस और बीजेपी भी एक राह है। कांग्रेस के प्रदेश प्रवक्ता स्वदेश शर्मा ने बताया कि प्रदेश रिश्वतखोरों की चपेट में है। निर्वाह भत्ता बंद होने से धांधली करने वाले अधिकारी-कर्मचारियों में भय भी होगा। निलंबन पर वेतन के 75 प्रतिशत तक राशि भत्ते के रूप में देने से दोषी सजा नहीं मौज ही कटता है। उधर बीजेपी प्रदेश प्रवक्ता शिवम शुक्ला ने कहा कि सरकार जीरो टॉलरेंस नीति पर काम कर रही है। ऐसे में कर्मचारी संगठन की ओर से मांग पर सरकार गंभीरता से विचार करेगी। यह मामला पहली बार सरकार के संज्ञान में लाया गया है। कर्मचारी संगठन की यह पहल स्वागत योग्य है।

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