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-इजरायली मिलिट्री इंटेलिजेंस की बिल्डिंग को भी बनाया निशाना
-हाइफा का पावर प्लांट जलकर खाक, पूरे क्षेत्र में ब्लैकआउट

नई दिल्ली। इजरायल और ईरान के बीच पिछले कई दिनों से संघर्ष जारी है। दोनों तरफ से जमकर बमबारी हो रही है। इसमें अब तक 200 से अधिक लोगों की मौत भी हो चुकी है और सैकड़ों इमारतों को भारी नुकसान हुआ है। इस सबके बीच सोमवार तडक़े (स्थानीय समयानुसार) ईरान ने इजरायल पर एक और मिसाइल अटैक किया। दावा है कि इन हमलों में इजरायल की खुफिया एजेंसियों के मुख्यालयों को निशाना बनाया गया।
ईरान ने इस बार इजरायली खुफिया एजेंसियों अमान और मोसाद के मुख्यालय को निशाना बनाया। रिपोर्ट में दावा किया गया है रविवार की आधी रात के करीब शुरू हुए पहले हमले के बाद जब एक फॉल्स अलार्म ने इजरायली इलाकों में घबराहट फैलाई, तब सोमवार की सुबह ईरान ने एक दूसरी मिसाइल वेव लॉन्च की। रिपोर्ट के मुताबिक, यह हमला सीधे इजरायल द्वारा कब्जा किए गए क्षेत्रों पर केंद्रित था। यह हमला मौजूदा संघर्ष की शुरुआत के बाद से दसवां बड़ा अटैक था। मीडिया की रिपोर्ट्स में दावा किया गया है कि इजरायल की कड़ी सेंसरशिप के बावजूद, ऑनलाइन सामने आए वीडियो फुटेज में हाइफा स्थित एक विशाल पावर प्लांट को आग की लपटों में घिरा देखा गया। इसके तुरंत बाद, कब्जे वाले क्षेत्रों में बिजली गुल होने की खबरें आईं।
अमन के लॉजिस्टिक सेंटर पर सीधा हमला
मिसाइल हमलों का मुख्य निशाना इजरायली सैन्य खुफिया एजेंसी अमान का लॉजिस्टिक सेंटर था, जो ग्लीलोट में स्थित है। यह वही क्षेत्र है जहां इजरायल की सैन्य खुफिया गतिविधियों का संचालन होता है। हमले के बाद यह लॉजिस्टिक सेंटर अब भी जल रहा था। रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि मिसाइल हमलों में मोसाद का मुख्यालय और यूनिट 8200 के कुछ गुप्त बैकअप ठिकानों को भी तबाह कर दिया गया। यूनिट 8200 इजरायल की इलेक्ट्रॉनिक निगरानी और खुफिया इकाई है जो साइबर युद्ध और डेटा इंटेलिजेंस में विशेषज्ञ मानी जाती है। इजरायली रक्षा प्रतिष्ठान की ओर से इन हमलों को बस स्टैंड या पार्किंग क्षेत्र को हुए नुकसान के रूप में पेश किया जा रहा है। लेकिन ईरानी मीडिया ने दावा किया है कि यह जानकारी भ्रामक है और असल में हमले सीधे रणनीतिक और खुफिया ठिकानों को लक्ष्य बनाकर किए गए थे। बता दें कि ईरान और इजरायल के बीच यह संघर्ष तब शुरू हुआ जब बीते शुक्रवार को इजरायल ने तेहरान के आवासीय क्षेत्रों और न्यूक्लियर साइट्स पर बड़े पैमाने पर हवाई हमले किए थे। इजरायल की इन कार्रवाइयों में अब तक 7 ईरानी सैन्य अधिकारियों, 9 परमाणु वैज्ञानिकों, और 220 से अधिक नागरिकों की मौत हो चुकी है।
ईरानी सेना के डिप्टी कमांडर की मौत
उधर, इजराइली हवाई हमले में ईरान के टॉप सैन्य अधिकारी मेजर जनरल अली शादमानी की मौत हो गई है। शादमानी ईरान की खतम-अल-अनबिया हेडक्वार्टर्स यानी सैन्य आपात कमान के प्रमुख थे। उन्होंने 4 दिन पहले ही यह पद संभाला था। उन्हें इजराइली हमले में मारे गए मेजर जनरल गुलाम अली राशिद की जगह यह जिम्मेदारी दी गई थी। राशिद की मौत पिछले शुक्रवार को हुई थी। इजराइली हमलों में अब 224 ईरानी मारे जा चुके है, जबकि 1,481 लोग घायल हुए हैं। वहीं, इजराइल में अब तक 24 लोग मारे गए हैं, जबकि 600 से ज्यादा घायल हैं।
600 से ज्यादा विदेशी अजरबैजान के रास्ते निकाले गए
इजराइल की तरफ से ईरान पर हमला शुरू होने के बाद से 600 से ज्यादा विदेशी नागरिकों को अजरबैजान के रास्ते ईरान से निकाला गया है। निकाले गए लोगों में 17 देशों के लोग शामिल हैं। इनमें रूस, बेलारूस, कजाकिस्तान, किर्गिस्तान, ताजिकिस्तान, उज्बेकिस्तान, जर्मनी, स्पेन, इटली, सर्बिया, रोमानिया, पुर्तगाल, संयुक्त राज्य अमेरिका, संयुक्त अरब अमीरात, चीन और वियतनाम के नागरिक शामिल हैं। कैस्पियन सागर तट पर अस्तारा चेकपॉइंट के जरिए बॉर्डर पार करने वाले लोगों को बाकू एयरपोर्ट पर ले जाया जा रहा है और वहां से उनके देश भेजा जा रहा है।
खामेनेई का हश्र सद्दाम हुसैन जैसा होगा
इजराइल के रक्षा मंत्री इजराइल काट्ज ने ईरान के सुप्रीम लीडर अयातुल्ला अली खामेनेई को चेतावनी दी है कि उनका हश्र इराक के सद्दाम हुसैन जैसा हो सकता है। काट्ज ने कहा कि मैं ईरानी तानाशाह को हमले जारी रखने और इजराइली नागरिकों पर मिसाइल दागने के खिलाफ चेतावनी देता हूं। काट्ज ने सद्दाम हुसैन का जिक्र करते हुए कहा कि उन्हें अपने पड़ोसी देश इराक के तानाशाह का हश्र याद रखना चाहिए, जिसने इजराइल के खिलाफ यही रास्ता चुना था। सद्दाम हुसैन इराक के पांचवें राष्ट्रपति थे। उन्होंने 1979 से 2003 तक शासन किया। उन्होंने ईरान-इराक युद्ध और खाड़ी युद्ध सहित कई प्रमुख संघर्षों के दौरान इराक का नेतृत्व किया। 2003 में, अमेरिका ने इराक पर हमला किया और सद्दाम के शासन को उखाड़ फेंका। सद्दाम हुसैन पर आतंकी संगठन अल-कायदा के साथ संबंध रखने का आरोप लगे और उन्हें गिरफ्तार कर लिया गया। 30 दिसंबर, 2006 को, उन्हें फांसी दे दी गई।
ईरान के बैंक पर साइबर अटैक
ईरान के बैंक सेपाह पर मंगलवार को साइबर अटैक हुआ, जिससे ऑनलाइन सेवाएं ठप हो गई हैं। ईरान की सेमी-गवर्नमेंट न्यूज एजेंसी स्न्रक्रस् के मुताबिक, इजराइल से जुड़े हैकर्स के एक ग्रुप ने बैंक पर साइबर अटैक की जिम्मेदारी ली है। साइबर अटैक के कारण बैंक के ग्राहकों को दिक्कतें आ रही हैं। ईरान के साइबर सुरक्षा कमांड ने बैंक अधिकारियों और उनके सिक्योरिटी डिटेल्स को ध्यान में रखते हुए सभी कनेक्टेड डिवाइस के इस्तेमाल पर बैन लगा दिया है। बैंक सेपाह पर साइबर अटैक गैस स्टेशनों पर सेवाओं को प्रभावित कर सकती हैं। क्योंकि गैस स्टेशनों पर सभी लेन-देन इसी बैंक के जरिए होती है।
ईरान ने सभी डॉक्टरों-नर्सों को छुट्टी से वापस बुलाया
ईरान ने ईजराइली हमलों के बीच छुट्टी पर गए सभी डॉक्टरों और नर्सों को काम पर वापस बुला लिया है। ईरान के उप स्वास्थ्य मंत्री सईद सज्जाद रजावी ने अपने बयान में कहा कि डॉक्टरों और नर्सों की सभी छुट्टियां रद्द कर दी गई हैं और उन्हें स्वास्थ्य केंद्रों पर लगातार मौजूद रहने के लिए कहा गया है।

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