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तेहरान। अमेरिका ने ईरान पर हमला किया इसके बाद अब खाड़ी देशों में जबरदस्त हलचल मची हुई है। हालात इतने तनावपूर्ण हो गए हैं कि अमेरिका को अपने ही दोस्त देशों- कुवैत, बहरीन, कतर और संयुक्त अरब अमीरात में हाई अलर्ट लागू करना पड़ा है। वजह साफ है- ईरान ने साफ तौर पर धमकी दे दी है कि अब अमेरिकी नागरिक और सैन्य अड्डे, चाहे जहां हों, उसके निशाने पर हैं। ईरान का यह रुख न केवल अमेरिका बल्कि मिडिल ईस्ट के लिए खतरे की घंटी है। खुफिया सूत्रों का कहना है कि ईरान की अगली कार्रवाई इन मुस्लिम देशों में स्थित अमेरिकी ठिकानों पर हो सकती है, जहां हजारों अमेरिकी सैनिक तैनात हैं और बड़ी मात्रा में हथियार जमा हैं। ईरान की इस चेतावनी के बाद अमेरिका ने न केवल अपने सैनिकों को सतर्क किया है, बल्कि अमेरिका ने फौरन चारों देशों में ‘कोड रेड अलर्ट’ जारी कर दिया है। अब वहां जमीन से लेकर आकाश तक रक्षा कवच बिछाया जा रहा है। मिसाइल डिफेंस सिस्टम और एंटी-ड्रोन टेक्नोलॉजी की तैनाती भी तेज कर दी है। सैन्य विश्लेषकों का मानना है कि ईरान इन देशों को अमेरिका का साथ देने की ‘सजा’ देने के लिए कोई बड़ा कदम उठा सकता है। इस घटनाक्रम ने पूरी दुनिया का ध्यान खाड़ी क्षेत्र की ओर खींच लिया है। भारत सहित एशिया के कई देशों की ऊर्जा सुरक्षा भी इसी क्षेत्र पर निर्भर है, ऐसे में हर अगला कदम वैश्विक राजनीति और आर्थिक स्थिरता पर असर डाल सकता है। अगर ईरान ने मिसाइलों या सुसाइड ड्रोन के जरिए हमला किया, तो अमेरिका को भारी नुकसान हो सकता है। खास बात यह है कि इन देशों की सुरक्षा प्रणाली इजरायल जितनी एडवांस्ड नहीं है। ऐसे में अगर ईरानी मिसाइलें अमेरिकी हथियार डिपो पर गिरती हैं, तो परिणाम विनाशकारी हो सकते हैं- सिर्फ अमेरिका के लिए नहीं, बल्कि इन चारों मेजबान देशों के लिए भी।

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