
कथा वाचक पर एफआईआर की मांग, मांगें सार्वजनिक माफी
गुना| कथा वाचक पंडित प्रदीप मिश्रा द्वारा भगवान श्री चित्रगुप्त महाराज के संबंध में व्यासपीठ से की गई अमर्यादित टिप्पणी के विरोध में मंगलवार को कायस्थ समाज का आक्रोश सडक़ों पर फूट पड़ा। शहर के पेंशनर पार्क से शुरू हुआ विरोध रैली में तब्दील होकर कलेक्ट्रेट पहुंचा, जहां जिला प्रशासन को मुख्यमंत्री के नाम ज्ञापन सौंपा गया और मिश्रा के विरुद्ध कड़ी कार्रवाई की मांग की गई। यह विरोध प्रदर्शन महज एक ज्ञापन देने की औपचारिकता नहीं था, बल्कि समाज के गुस्से और आत्मसम्मान की हुंकार थी। ‘कायस्थ एकता जिंदाबाद’, ‘भगवान चित्रगुप्त महाराज की जय’, और ‘धर्म के नाम पर अपमान नहीं सहेंगे’ जैसे नारों से गुना की फिजाएं गूंज उठीं। समाज के युवा, महिलाएं, वरिष्ठ नागरिक सभी इसमें सहभागी बने और शांतिपूर्ण लेकिन प्रभावशाली ढंग से अपनी बात रखी।
ज्ञापन में बताया गया कि 14 जून 2025 को महाराष्ट्र में कथा के दौरान पंडित प्रदीप मिश्रा ने कायस्थ समाज के आराध्य भगवान श्री चित्रगुप्त महाराज पर बेहद आपत्तिजनक और अपमानजनक टिप्पणी की, जिससे समाज की धार्मिक भावनाएं गहरी रूप से आहत हुई हैं। यह पहली बार नहीं है जब मिश्रा विवादों में आए हैं, पूर्व में भी वे श्री राधारानी और अन्य हिन्दू देवी-देवताओं के खिलाफ अमर्यादित टिप्पणियों को लेकर निशाने पर रहे हैं। समाज के प्रतिनिधियों ने स्पष्ट कहा कि मिश्रा जैसे कथावाचकों का मंच से इस तरह धार्मिक आस्थाओं पर हमला करना न केवल निंदनीय है, बल्कि यह सामाजिक समरसता के लिए भी खतरा है। अगर समय रहते इस तरह के बयानों पर लगाम नहीं लगाई गई तो समाज में धार्मिक उन्माद, वैमनस्य और असहिष्णुता की आग को और भडक़ाने वाले तत्व प्रोत्साहित होंगे।
प्रदर्शनकारियों ने कहा कि वे संविधान और लोकतंत्र का सम्मान करते हैं, इसलिए उनका विरोध पूर्णत: शांतिपूर्ण और अनुशासित रहा। किंतु यदि प्रशासन और शासन द्वारा शीघ्र उचित कार्रवाई नहीं की गई, तो समाज को मजबूरन प्रदेशव्यापी आंदोलन की राह अपनानी पड़ेगी। उनकी प्रमुख मांग रही कि पंडित प्रदीप मिश्रा के खिलाफ धार्मिक भावनाएं आहत करने की धाराओं में मामला दर्ज किया जाए और उन्हें सार्वजनिक रूप से क्षमा याचना के लिए बाध्य किया जाए। ज्ञापन सौंपने वालों में राधेश्याम श्रीवास्तव, अवधेश श्रीवास्तव, जगदीश श्रीवास्तव, नीलम श्रीवास्तव, सुरभि सक्सेना, भानु सक्सेना, ममता श्रीवास्तव, शालिनी निगम सहित अनेक समाजसेवी एवं महिलाएं शामिल रहीं। सभी ने एक स्वर में चेतावनी दी कि समाज की सहनशीलता को उसकी कमजोरी न समझा जाए। –
