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हांका गैंग की उदासीनता का खामियाजा भुगत रही जनता
जबलपुर। शहर में पालतू पशुओं की धमाचौकड़ी से जनजीवन खतरे में है। शहर के मुख्य मार्गों पर दिन और रात में भी आवारा पशुओं के झुंड अपना डेरा डाले रहते है। इससे आये दिन सड़क दुर्घटनाएं हो रही है। लोग हताहत हो रहे है लेकिन पालतू पशुओं को पकड़कर कांजी हाउस में जाने व पशु पालकों पर चालानी कार्यवाही करने में नगर निगम द्वारा कोताही बरती जा रही है। शहर में पालतू गाय भैस के अलावा आवारा श्वानों और शूकर बहुत तांडव मचाये है।
सब्जी मंडी लटकारी का पड़ाव, निवाड़गंज, बड़ा फुहारा, बल्देवबाग, चेरीताल, गढ़ाफाटक, शंकर घी भंडार, मालवीय चौक, दीक्षितपुरा, गोरखपुर, लटकारी का पड़ाव, गढ़ाफाटक से जगदीश मंदिर जाने वाला मार्ग, शंकर घी भंडार से आगा चौक, घमापुर, बेलबाग, कांचघर तिलकभूमि तलैया, नरघैया, तक मुख्य मार्ग पर दिन दहाड़े आवारा पशुओं का तांडव देखा जा सकता है। वहीं रात में भी इन मार्गो पर आवारा पशु डेरा जमाये रहते है। सूकर और श्वान के बीच होने वाले युद्ध से स्थिति दुरूह हो जाती है। आवारा श्वान जब सूकरों और गाय, भैस को भौंककर खदेड़तें है इसी बीच आने वाले राहगीर इन आवारा पशुओं का शिकार हो जाते है। सब्जी मंडी में तो आवारा पशु कई बार भगदड़ मचवा देते है। मंडी में नीचे लगी दुकानों पर गाय बैल के मुंह मारने पर व्यापारी उन्हें डंडा लेकर खदेड़ते है तब भगदड़ सी स्थिति बन जाती है। मोहरर्म पर्व प्रारंभ हो जाने के कारण अब रात भर सड़कों पर चहल पहल रहेगी, इस दौरान अवारा पशुओं की धमाचौकड़ी परेशानी का सबब बन सकती है| शहर के अंदर पशुपालकों पर लगाम नहीं कसने के कारण रात में पशु खुले में छोड़ दिए जाते है जो बीच सड़कों में बैठकर दुर्घटनाओं को आमंत्रण दे रहे है| काले रंग के पशु अंधेरे में दिखाई नहीं पड़ते, जिससे कई बार साइकिल व वाहन चालक दुर्घटना का शिकार हो जाते है| शहर में प्रतिबंध के बावजूद शहर में डेरियां चल रही है। डेरी मालिक रात में इन पशुओं को आवारा छोड़ देते है। इसी प्रकार पालतू गाय और सूकर भी रात में छोड़ दिये जाते है। पहले नगर निगम की हांका गैंग इन आवारा पशुओं को पकड़कर कांजी हाउस में बंद कर देती थी, लेकिन अब पशु अत्याचार अधिनियम प्रभावी हो जाने के बाद नगर निगम द्वारा आवारा पशुओं को पकड़ने की कार्यवाही शिथिल कर दी गई। जबकि व्यवस्था यह है कि पशुओं को ले जाकर गौ-शाला में छोड़ दिया जाये और पशु पालकों से चालान बसूला जाये। लेकिन अब स्थिति से निपटने के लिए नगर निगम उदासीन नजर आती है। लिहाजा शहर की सड़कों पर पशुओं का तांडव बना हुआ है।

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