
हाई कोर्ट ने मुख्य सचिव सहित अन्य से शपथ पत्र पर मांगा जवाब
जबलपुर। हाई कोर्ट के कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश संजीव सचदेवा व न्यायमूर्ति विनय सराफ की युगलपीठ ने मुख्यमंत्री बाल श्रवण योजना में भ्रष्टाचार के आरोप को गंभीरता से लिया। इसी के साथ राज्य शासन, मुख्य सचिव, प्रमुख सचिव स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण, मिशन डायरेक्टर, राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन, मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी, जबलपुर व डीइआइएम सुभाष शुक्ला को शपथ पत्र पर जवाब पेश करने के निर्देश दे दिए। इसके लिए 14 जुलाई से पूर्व तक का समय दिया गया है। कोर्ट ने भ्रष्टाचार की शिकायत को लेकर अब तक की गई कार्रवाई का शपथ पत्र सक्षम अधिकारी को प्रस्तुत करने के दिशा-निर्देश दिए हैं।
जनहित याचिकाकर्ता शिवसेना नेता, जबलपुर निवासी शैलेंद्र बारी की ओर से अधिवक्ता अमिताभ गुप्ता ने दलील दी कि दिव्यांग बच्चों के लिए कोक्लियर इम्प्लांट की खरीद और उपयोग के संबंध में व्यापक अनियमितता की गई है। क्रय किए गए इम्प्लांट घटिया गुणवत्ता के थे। सुनवाई के दौरान राज्य शासन की ओर से शासकीय अधिवक्ता ने अवगत कराया कि मुख्यमंत्री बाल श्रवण योजना में कथित अनियमितता के संबंध में लेखा-परीक्षा आपत्ति उठाई गई थी और सक्षम प्राधिकारी यानि मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी ने पहले ही कार्रवाई शुरू कर दी है और कारण बताओ नोटिस जारी कर जवाब मांगा है। जवाब प्राप्त हो गया है और मामला सक्षम प्राधिकारी के सक्रिय विचाराधीन है। उन्होंने कहा कि चूंकि सक्षम प्राधिकारी ने पहले ही कार्रवाई शुरू कर दी है, इसलिए इस रिट याचिका में नोटिस जारी करने की कोई आवश्यकता नहीं है। उन्होंने पूर्व-सूचना चरण में उठाए गए कदमों का खुलासा करते हुए शपथ-पत्र प्रस्तुत करने के लिए समय मांगा। कोर्ट ने मांग स्वीकार करते हुए 14 जुलाई से पूर्व कार्रवाई संबंधी शपथ-पत्र प्रस्तुत करने के निर्देश दे दिए।
जनहित याचिका में लगाए गए आरोप ………….
जनहित याचिकाकर्ता के अनुसार मुख्यमंत्री बाल श्रवण योजना के अंतर्गत बोलने सुनने में दिव्यांग बच्चों के लिये उपयोग किए जाने वाले घटिया स्तर के काक्लियर इम्प्लांट्स की खरीद और उपयोग की अनियमितता की गई। इस योजना में जन्मजात बहरे दिव्यांग बच्चों के उपचार हेतु काक्लियर इम्प्लान्ट आपरेशन करने के बाद उनकी फालोअप थेरेपी किए बिना ही निजी संस्था को उसका भुगतान करने से शासन द्वारा किया गया दो करोड़ 28 लाख रुपये का व्यय निष्फल हो गया है। बिना इलाज के सरकार से इलाज के पैसे वसूलने का मामला गंभीर प्रकृति की वित्तीय अनियमितता है। प्रदेश के दिव्यांग बच्चों में सुनने की क्षमता विकसित करने हेतु वर्ष 2016 में काक्लियर इम्प्लांट आपरेशन किए जाने के चार साल बाद वर्ष 2020 में जबलपुर में पदस्थ डीइआइएम सुभाष शुक्ला द्वारा भोपाल स्थित संस्था से साठगांठ कर बिना बच्चों की फोलोअप चिकित्सा के फालोअप की राशि का भुगतान करने हेतु नोटशीट प्रस्तुत कर फर्जी भुगतान कराया गया।
